बीजापुर: छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति (Rehabilitation Policy) नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिख रही है। इसी का एक प्रेरणादायक उदाहरण बीजापुर जिले के कोंडापल्ली गांव के निवासी मासा तामो हैं, जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा (Mainstream) से जुड़ने का फैसला किया और आज सम्मानजनक जीवन जीते हुए अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
एक समय नक्सली गतिविधियों से जुड़े रहे मासा तामो ने सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति पर भरोसा जताते हुए मुख्यधारा में वापसी की। पुनर्वास के बाद उन्होंने गांव में एक दुकान शुरू की, जिसका संचालन कर वे आज आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं। उनके इस बदलाव ने क्षेत्र के अन्य युवाओं और नक्सल प्रभावित लोगों के सामने भी एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
सुशासन तिहार (Sushasan Tihar) के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कोंडापल्ली गांव यात्रा के समय मासा तामो से उनकी मुलाकात हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनसे चर्चा कर उनके जीवन में आए बदलाव की जानकारी ली और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराना है। आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को पुनर्वास के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें नई पहचान और बेहतर भविष्य देने का प्रयास किया जा रहा है।
मासा तामो की कहानी यह दर्शाती है कि विश्वास, अवसर और सरकारी सहयोग मिलने पर कोई भी व्यक्ति हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है। उनका जीवन अब संघर्ष से सफलता की ओर बढ़ते उस बदलाव का प्रतीक बन गया है, जिसे राज्य सरकार की पुनर्वास नीति मजबूत आधार प्रदान कर रही है।
सुशासन सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने आत्मसमर्पित नक्सलियों को सम्मानजनक जीवन और नई पहचान देने का काम किया है। बीजापुर जिले के कोंडापल्ली गांव में आज दुकान का संचालन कर अपने परिवार को संभाल रहे मासा तामो इसका उदाहरण हैं।
सुशासन तिहार के दौरान बीजापुर जिले के… pic.twitter.com/6cECrezlrI
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) June 3, 2026