राज्यसभा चुनाव से पहले MP में सियासी ड्रामा, 4 घंटे बाद कांग्रेस विधायकों के विमान को मिली उड़ान की मंजूरी

कांग्रेस नेताओं के अनुसार विमान संचालन से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज एयरपोर्ट अथॉरिटी को पहले ही सौंप दिए गए थे। इसके बावजूद विमान को उड़ान की मंजूरी मिलने में देरी हुई।

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  • Publish Date - June 9, 2026 / 06:21 PM IST

भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारी विवाद और कई घंटों की अनिश्चितता के बाद आखिरकार कांग्रेस विधायकों (Congress MLAs) को लेकर जाने वाले विशेष विमान को भोपाल एयरपोर्ट से उड़ान भरने की अनुमति मिल गई। हालांकि इस दौरान कांग्रेस के विधायक अपने परिवारों के साथ करीब चार घंटे तक एयरपोर्ट पर इंतजार करते रहे।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार विमान संचालन से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज एयरपोर्ट अथॉरिटी को पहले ही सौंप दिए गए थे। इसके बावजूद विमान को उड़ान की मंजूरी मिलने में देरी हुई। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सवाल भी उठाए। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के विशेष विमान को जानबूझकर रोका गया था।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी के 62 विधायक दो चरणों में कर्नाटक रवाना होंगे। उन्हें बेंगलुरु के वंडरला रिजॉर्ट में ठहराने की तैयारी की गई है। पार्टी का उद्देश्य राज्यसभा चुनाव से पहले अपने विधायकों को एकजुट रखना और संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं को रोकना है।

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है। इस बार चुनाव बेहद दिलचस्प माना जा रहा है क्योंकि तीन सीटों पर चार उम्मीदवार मैदान में हैं। भारतीय जनता पार्टी ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को और रोचक बना दिया है।

तीसरी सीट के लिए भाजपा के महेश केवट और कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। इसी वजह से दोनों दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सीट पर हर वोट की अहम भूमिका रहेगी।

विमान को उड़ान की मंजूरी नहीं मिलने के बाद एयरपोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की आवश्यक अनुमति के बिना किसी विमान को उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बाद में जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद विमान को अनुमति दे दी गई।

कांग्रेस का आरोप है कि राज्यसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को लेकर भी अनावश्यक आपत्तियां उठाई जा रही हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राज्यसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में बढ़ती हलचल और विधायकों को सुरक्षित रखने की रणनीति ने चुनावी मुकाबले को और अधिक रोमांचक बना दिया है।