23 साल बाद सुलझेगा देवभोग हीरा खदान विवाद, कानूनी अड़चन दूर करने में जुटी छत्तीसगढ़ सरकार

By : hashtagu, Last Updated : June 26, 2026 | 8:56 pm

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार गरियाबंद जिले के देवभोग (deobhog) स्थित बहुचर्चित हीरा खदान परियोजना से जुड़ी 23 साल पुरानी कानूनी अड़चनों को दूर करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार का मानना है कि विवाद समाप्त होने के बाद प्रदेश की इस महत्वपूर्ण खनिज परियोजना का रास्ता साफ होगा और राज्य को आर्थिक लाभ के साथ रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।

देवभोग क्षेत्र में वर्ष 1984 में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने बड़े हीरा भंडार की पहचान की थी। इसके बाद वर्ष 1999 में एक निजी कंपनी को करीब 4,600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सर्वेक्षण और हीरे की खोज का अधिकार दिया गया था। हालांकि, वर्ष 2001 में तत्कालीन राज्य सरकार ने शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कंपनी का अनुबंध रद्द कर दिया था। इसके बाद मामला न्यायाधिकरण और अदालतों तक पहुंच गया, जिससे परियोजना पिछले 23 वर्षों से कानूनी विवाद में फंसी हुई है।

सरकार अब इस लंबे समय से लंबित विवाद का समाधान निकालने के लिए कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी कानूनी बाधाएं दूर होने के बाद देवभोग की हीरा परियोजना को फिर से शुरू करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार देवभोग क्षेत्र देश के प्रमुख हीरा भंडार वाले इलाकों में माना जाता है। यदि यहां खनन कार्य शुरू होता है तो राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र में सड़क, बिजली तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास को भी गति मिलेगी।

लंबे समय से खदान बंद रहने के कारण इस क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। पहले भी पुलिस ने देवभोग क्षेत्र से हीरों की तस्करी के मामलों में कार्रवाई की है, जिससे इस बहुमूल्य खनिज क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जाती रही है।

राज्य सरकार का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना को नियमानुसार आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि प्रदेश की बहुमूल्य खनिज संपदा का वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से उपयोग किया जा सके।