बस्तर में बंद पड़े स्कूलों में फिर गूंजेगी बच्चों की आवाज, खाली हुए सुरक्षा कैंप बनेंगे नए विद्यालय

By : hashtagu, Last Updated : July 1, 2026 | 2:45 pm

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में वर्षों से बंद पड़े स्कूलों (closed school) में एक बार फिर पढ़ाई शुरू होने जा रही है। नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा स्थिति बेहतर होने के बाद खाली किए गए सुरक्षा बलों के कैंपों को अब स्कूलों में बदला जाएगा। राज्य सरकार का उद्देश्य दूर-दराज के गांवों के बच्चों को उनके घर के पास बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना और शिक्षा व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना है।

लंबे समय तक नक्सली हिंसा के कारण बस्तर के कई इलाकों में स्कूल बंद रहे थे। कई स्कूल भवनों का उपयोग सुरक्षा बलों के कैंप के रूप में किया गया, जबकि कई जगह बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हुई। अब हालात सामान्य होने के साथ सुरक्षा बल नए कैंपों में स्थानांतरित हो रहे हैं, जिससे खाली हुए भवनों को दोबारा स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि शिक्षा को सामान्य स्थिति में लाना उसकी प्राथमिकता है। बंद स्कूलों को दोबारा खोलने के साथ-साथ उनमें आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में पढ़ाई का अवसर मिल सके। इससे उन हजारों छात्रों को लाभ मिलेगा, जो वर्षों से शिक्षा से वंचित रहे या दूर-दराज के क्षेत्रों में पढ़ाई के लिए संघर्ष कर रहे थे।

बस्तर में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार पहले से बंद पड़े स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा शुरू कर रही है। इसके साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है ताकि बच्चों का नामांकन बढ़े और स्कूलों में नियमित पढ़ाई सुनिश्चित हो सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा संस्थानों के दोबारा शुरू होने से न केवल बच्चों का भविष्य बेहतर होगा, बल्कि क्षेत्र में सामान्य जीवन की वापसी और विकास को भी नई गति मिलेगी। लंबे समय तक हिंसा से प्रभावित रहे बस्तर में स्कूलों का फिर से खुलना सामाजिक बदलाव और स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।