जग्गी मर्डर केस में बड़ा फैसला: 20 साल बाद अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक निर्णय
By : hashtagu, Last Updated : April 6, 2026 | 12:17 pm
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रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड (murder case) में करीब 20 साल बाद बड़ा फैसला सामने आया है। हाईकोर्ट (High Court) ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी (Amit Jogi) को उम्रकैद (life imprisonment) की सजा सुनाई है। अदालत ने साफ कहा कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो किसी एक आरोपी के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिविजनल बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे सबूत हों, तो किसी एक को बरी करना और बाकी को उन्हीं सबूतों के आधार पर दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है, जब तक उसके पीछे कोई ठोस और अलग कारण न हो।
हाईकोर्ट ने अमित जोगी को IPC की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी है। इसके साथ ही 1000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
इस बीच, अमित जोगी ने फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। उन्होंने आरोप लगाया है कि CBI चार्जशीट के 11 हजार पन्ने पढ़ने के लिए उन्हें केवल 24 घंटे दिए गए और पर्याप्त सुनवाई का मौका दिए बिना दोषी ठहराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने बिना ठोस आधार के CBI की अपील स्वीकार कर ली।
गौरतलब है कि 4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 आरोपियों को सजा मिली थी।
बाद में 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर पहले स्टे मिला, और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को फिर से हाईकोर्ट को भेज दिया था। अब दो दशक बाद आए इस फैसले ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है।