वन अधिकार कानून पर सियासत तेज: चरणदास महंत बोले- आदिवासियों के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, सरकार पर साधा निशाना

By : hashtagu, Last Updated : May 30, 2026 | 8:03 pm

रायपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में वन अधिकार कानून (Forest Rights Act-FRA) और आदिवासी अधिकारों (Tribal Rights) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आदिवासियों को मिले संवैधानिक और कानूनी अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है और कई मामलों में उन्हें उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

चरणदास महंत ने कहा कि वन अधिकार कानून का उद्देश्य जंगलों में पीढ़ियों से रहने वाले आदिवासी और पारंपरिक वन निवासियों को भूमि, संसाधनों और आजीविका से जुड़े अधिकार देना है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पात्र लोगों को समय पर वन अधिकार पट्टे मिलें और उनके दावों का निपटारा पारदर्शी तरीके से हो।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आदिवासी समाज केवल जमीन से नहीं बल्कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और जंगलों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में किसी भी विकास परियोजना या प्रशासनिक निर्णय से पहले ग्राम सभाओं की सहमति और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने पेसा कानून (PESA Act) और ग्राम सभाओं की भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

महंत ने कहा कि संविधान ने अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को विशेष संरक्षण दिया है। यदि वन अधिकार कानून और ग्राम सभा से जुड़े प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया तो इससे आदिवासी समाज का भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि लंबित दावों की समीक्षा कर पात्र हितग्राहियों को जल्द अधिकार दिए जाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि वन अधिकार कानून केवल भूमि का मामला नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और आदिवासी सम्मान से जुड़ा विषय है। सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिससे जंगलों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो और उनके पारंपरिक अधिकार सुरक्षित रहें।

छत्तीसगढ़ में वन अधिकार कानून और आदिवासी हितों को लेकर पहले भी कई बार राजनीतिक बहस होती रही है। राज्य के बड़े हिस्से में आदिवासी आबादी निवास करती है और वन अधिकार, ग्राम सभा की शक्तियां तथा प्राकृतिक संसाधनों पर समुदायों के अधिकार लंबे समय से महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे रहे हैं।