सुप्रीम कोर्ट ने कहा – स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना रेप का प्रयास है
By : hashtagu, Last Updated : February 18, 2026 | 8:31 pm
By : hashtagu, Last Updated : February 18, 2026 | 8:31 pm
नई दिल्ली, 18 फरवरी 2026। भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के उस विवादित फैसले को रद्द कर दिया जिसमें कहा गया था कि किसी का स्तन पकड़ना (Grabbing breasts) और पायजामे का नाड़ा खींचना (Pulling pyjama string) रेप का प्रयास नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि ऐसे कृत्य रेप के प्रयास (Attempt to Rape) के योग्य हैं और उन्हें इसी तरह की गंभीर धाराओं के तहत देखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला कानूनी प्रावधानों का गलत और संवेदनहीन अनुप्रयोग (Insensitive application) था और इसे खारिज कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि जब आरोपों का बारीकी से अध्ययन किया जाता है तो इसमें आरोपियों का पूर्व निर्धारित इरादा (Predetermined intent) स्पष्ट दिखाई देता है, इसलिए इसे रेप के प्रयास की श्रेणी में माना जाना चाहिए। इस फैसले के साथ हाईकोर्ट की उस टिप्पणी को भी निरस्त किया गया जिसमें कहा गया था कि स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचने जैसे कृत्य केवल “रेप की तैयारी (Preparation)” हैं, न कि रेप का प्रयास।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उसकी टिप्पणियाँ केवल प्राथमिक (Prima facie) आधार पर हैं और इस बात का निष्कर्ष नहीं है कि आरोपी दोषी हैं या नहीं। यह केवल यह स्थापित करता है कि आरोपों पर रेप के प्रयास के आरोप लगाए जा सकते हैं और इस दिशा में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। अदालत ने अपना आदेश 10 फरवरी को सुनाया।
इस वैधानिक बदलाव के बाद अब ऐसे मामलों में संरक्षण वन स्टाइल सेक्सुअल ऑफेन्स (POCSO Act) या भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत रेप का प्रयास माना जाएगा और अपराधी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह संकेत भी दिया है कि यौन अपराध मामलों में संवेदनशीलता (Sensitivity) और न्याय की पहुंच दोनों को ध्यान में रखते हुए फैसले होने चाहिए।