एआईबीएन के प्रोफेसर यू चेंगझोंग के अनुसार, अन्य ब्रेस्ट कैंसरों के विपरीत, टीएनबीसी में अन्य कैंसरों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ पारंपरिक उपचारों द्वारा लक्षित प्रोटीन की कमी होती है, जिससे प्रभावी उपचार करना एक चुनौती बन जाता है।
अमेरिका में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एरन आंद्रेचेक ई2एफ5 जीन और स्तन कैंसर के विकास में इसकी भूमिका पर शोध कर रहे हैं।
स्तन कैंसर को लेकर लोगों में कई सारी भ्रांतियां है, जिसे दूर करने के लिए आईएएनएस ने दिल्ली के सी.के. बिरला अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सलाहकार डॉ. नितिन एस.जी से बात की।
भारत में महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम कैंसर है। उच्च मृत्यु दर के साथ यह देश में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय है।
फ्रेड हच के प्रोस्टेट कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक की निदेशक हीदर चेंग ने कहा कि पुरुषों को यह पता लगाने के लिए पर्याप्त आनुवंशिक परीक्षण नहीं मिल रहे हैं कि उनमें बीआरसीए1 या बीआरसीए2 जीन वैरिएंट है या नहीं।
उन्होंने कहा, ''इससे प्रभावित लोगों के लिए यह अत्यंत तनावपूर्ण है और इसका जीवन की गुणवत्ता पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।''
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्तन कैंसर दुनिया भर में महिलाओं को प्रभावित करने वाला सबसे आम प्रकार का कैंसर है।
डॉक्टरों (Doctors) ने मंगलवार को कहा कि 20-40 साल की युवा महिलाओं में स्तन कैंसर की घटनाएं काफी बढ़ रही हैं।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग के एचओडी प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने ग्लोबोकैन 2020 अध्ययन का हवाला देते हुए यह जानकारी दी।
स्तन कैंसर दुनिया भर में महिलाओं को प्रभावित करने वाला सबसे आम प्रकार का कैंसर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2020 में 20 लाख से अधिक महिलाओं में स्तन कैंसर का पता चला और इसमें 6 लाख से अधिक महिलाओं की जान चली गई।