बस्तर पंडुम 2026 में जनजातीय संस्कृति का भव्य प्रदर्शन, सुकमा के कलाकारों ने जीते सम्मान

By : dineshakula, Last Updated : February 9, 2026 | 8:03 pm

जगदलपुर, 09 फरवरी 2026: माँ दंतेश्वरी की पावन धरती पर आयोजित बस्तर पंडुम 2026 (Bastar Pandum 2026) ने बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति (tribal culture), परंपराओं और पहचान को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया। लाल बाग मैदान में हुए समापन समारोह में पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, जनजातीय वेशभूषा, खानपान और शिल्प ने दर्शकों का दिल जीत लिया। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं रहा, बल्कि जनजातीय संरक्षण और संवेदनशील प्रशासन की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बना।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (Vishnu Deo Sai) की पहल पर आयोजित इस महोत्सव में उन परंपराओं को विशेष रूप से स्थान दिया गया, जो समय के साथ विलुप्त होने की कगार पर थीं। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को अपनी कला को मूल स्वरूप (original form) में प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

इस आयोजन में सुकमा जिला प्रशासन की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। जिले के कलाकारों ने मंच पर बस्तर की आत्मा को जीवंत कर दिया। छिंदगढ़ विकासखंड के किंदरवाड़ा निवासी गुंजन नाग और किरण नाग ने जनजातीय वेशभूषा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर सुकमा जिले के साथ पूरे बस्तर का गौरव बढ़ाया।

इस उपलब्धि पर देश के गृहमंत्री  अमित शाह (Amit Shah) और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कलाकारों को स्मृति चिन्ह और 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान जनजातीय कलाकारों के प्रति सरकार के विश्वास और समर्थन को दर्शाता है।

बस्तर पंडुम 2026 में सुकमा जिले से 12 विधाओं में 69 कलाकारों की सहभागिता रही, जिसने यह साबित किया कि सही मंच और अवसर मिलने पर जनजातीय प्रतिभाएं नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं। यह सहभागिता आत्मसम्मान (self-respect), पहचान (identity) और भविष्य की उम्मीद का प्रतीक बनी।

यह आयोजन यह भी संदेश देता है कि राज्य सरकार का विकास मॉडल केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सम्मान को भी समान महत्व देता है।