बस्तर पंडुम 2026 समापन में अमित शाह का बड़ा संदेश, संस्कृति ही बस्तर की असली पहचान

By : hashtagu, Last Updated : February 10, 2026 | 7:06 pm

रायपुर, 9 फरवरी 2026: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) आज छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और आम नागरिक मौजूद रहे।

समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर की पहचान बारूद (gunpowder) या हिंसा नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध संस्कृति और विरासत (rich culture and heritage) है। उन्होंने कहा कि जो बस्तर कुछ वर्ष पहले नक्सल भय (naxal fear) और मोर्टार, बंदूक की गोलियों व IED धमाकों से सहमा रहता था, आज वहीं 55 हजार से अधिक आदिवासियों (tribals) ने खान-पान, गीत, नृत्य, नाटक, वेशभूषा, परंपरा और वन औषधि जैसी 12 विधाओं में भाग लेकर अपनी संस्कृति को पुनर्जीवित किया है, जो एक ऐतिहासिक परिवर्तन है।

अमित शाह ने कहा कि बस्तर पंडुम ने आदिवासी संस्कृति (tribal culture) को नई ऊर्जा दी है। पिछले आयोजन में जहां 7 विधाओं में प्रतियोगिताएं हुई थीं, वहीं इस बार 5 नई विधाओं को जोड़कर कुल 12 विधाओं में आयोजन किया गया। इस आयोजन में बस्तर संभाग के सात जिलों, 1885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों से 55 हजार प्रतिभागियों ने सहभागिता की, जो यह साबित करता है कि बस्तर अब नक्सल भय से मुक्त हो रहा है।

गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर जैसी कला और संस्कृति दुनिया के किसी भी जनजातीय क्षेत्र में दुर्लभ है। यहां की कला, गीत और नृत्य केवल बस्तर की धरोहर नहीं बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक पहचान हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के समय से यहां की जनजातियों ने अपनी परंपराओं को सहेज कर रखा है और आने वाले समय में बस्तर के नृत्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान बनाएंगे।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश और दुनिया तक पहुंचे। मोदी सरकार आदिवासी जनजातियों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और बस्तर की कला, नृत्य और संस्कृति को वैश्विक सम्मान दिलाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल किताबों में नहीं, बल्कि जनमानस की स्मृतियों में जीवित रहता है।

गृह मंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस और उनकी 150वीं जयंती को जनजातीय गौरव वर्ष घोषित करना, जनजातीय समाज के प्रति प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि जनजातीय शिल्प, संस्कृति, व्यंजन और वन उत्पादों के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा दिया गया है और लाखों वन उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था की गई है।

अमित शाह ने कहा कि कला, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बस्तर के कई आदिवासी विभूतियों को पद्म पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है और 700 से अधिक जनजातीय नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने की योजना पर काम हो रहा है। 200 करोड़ रुपये की लागत से बने ट्राइबल म्यूजियम में आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले जनजातीय नेताओं की स्मृतियों को संजोया गया है।

गृह मंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम की 12 विधाओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां वे अपनी कला और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे, जो बस्तर के लिए गौरव का विषय है।

नक्सलवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का मूल उद्देश्य आदिवासी किसानों, निर्दोष बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि IED से सबसे ज्यादा नुकसान आदिवासियों को ही होता है। उन्होंने नक्सलियों से हथियार डालकर आत्मसमर्पण (surrender) करने की अपील की और कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वालों का सम्मानजनक पुनर्वासन (rehabilitation) करेगी, लेकिन हथियार उठाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और हथियार का जवाब हथियार से दिया जाएगा।

अमित शाह ने कहा कि अगले पांच वर्षों में बस्तर देश के सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्रों में शामिल होगा। नई पर्यटन गतिविधियां (tourism activities) जैसे एडवेंचर टूरिज्म, होम स्टे, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बंद पड़े स्कूल, अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दोबारा शुरू किए जाएंगे। हर गांव में सड़क, मोबाइल टावर, पोस्ट ऑफिस और बैंक सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी।

उन्होंने कहा कि आदिवासी किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा और प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो चावल मुफ्त दिया जाएगा। हर घर नल से जल, गैस सिलेंडर और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।

गृह मंत्री ने बताया कि 3500 करोड़ रुपये की रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना पर काम शुरू हो चुका है। इंद्रावती नदी पर नई सिंचाई परियोजना से 120 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में कर्फ्यू जैसा माहौल नहीं है और गांवों में रात को सांस्कृतिक गतिविधियां दिखाई देती हैं, जो बड़े बदलाव का संकेत है।

अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में लगे सुरक्षाबलों को धन्यवाद दिया और बलिदान देने वाले जवानों के परिजनों के प्रति कृतज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा में बस्तर पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा और इस पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए।