मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत ने बदली तेल रणनीति, अमेरिका-रूस और अफ्रीका से बढ़ाई खरीद
By : dineshakula, Last Updated : March 8, 2026 | 8:53 pm
By : dineshakula, Last Updated : March 8, 2026 | 8:53 pm
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ते संघर्ष और तेल आपूर्ति (Oil Supply) पर संभावित असर को देखते हुए भारत (India) ने अपनी ऊर्जा रणनीति बदलते हुए अमेरिका (United States), रूस (Russia) और पश्चिम अफ्रीका (West Africa) से कच्चे तेल (Crude Oil) की खरीद बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। भारतीय रिफाइनरियां (Refineries) अतिरिक्त तेल कार्गो की बातचीत कर रही हैं ताकि पेट्रोल-डीजल की घरेलू आपूर्ति (Domestic Fuel Supply) पर किसी तरह का संकट न आए।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक अगर पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा चलता है तो खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए भारतीय रिफाइनरियां पहले से तैयारी कर रही हैं और अतिरिक्त स्रोतों से तेल खरीदने की रणनीति बना रही हैं। इसके साथ ही कई रिफाइनरियों ने अपने निर्धारित मेंटेनेंस शटडाउन को भी टाल दिया है ताकि उत्पादन सामान्य स्तर पर चलता रहे और देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार बनाया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरता है और इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण तेल परिवहन और कीमतों दोनों पर दबाव बन सकता है। इसी वजह से भारत जैसे बड़े आयातक देश वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदकर जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए सरकार और तेल कंपनियां लगातार ऐसी रणनीति बना रही हैं जिससे किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन की आपूर्ति प्रभावित न हो।