धरती की गति से बदलती हैं तारीखें, जानिए क्यों अलग-अलग होते हैं हिंदू नववर्ष के दिन

By : hashtagu, Last Updated : March 19, 2026 | 4:47 pm

रायपुर, छत्तीसगढ़: धरती (Earth rotation) की गति और सूर्य (Sun) व चंद्रमा (Moon) की चाल के कारण ही अलग-अलग कैलेंडर में नए साल की तारीखें बदलती रहती हैं। वैज्ञानिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार हिंदू नववर्ष (Hindu New Year) एक ही दिन तय नहीं होता, क्योंकि यह सौर (solar) और चंद्र (lunar) गणना के अंतर पर आधारित होता है।

दरअसल, पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है और अपनी धुरी पर भी घूमती रहती है। इसी खगोलीय प्रक्रिया के कारण समय और तारीखों में बदलाव आता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि साल का प्राकृतिक चक्र मार्च के आसपास पूरा होता है, जब दिन और रात लगभग बराबर होते हैं और प्रकृति में नया चक्र शुरू होता है।

हिंदू कैलेंडर पूरी तरह ग्रेगोरियन कैलेंडर जैसा नहीं है, बल्कि यह चंद्र और सौर दोनों पर आधारित एक लूनी-सोलर प्रणाली है। इसमें महीनों और साल की गणना चंद्रमा और सूर्य दोनों की गति को ध्यान में रखकर की जाती है।

यही कारण है कि हिंदू नववर्ष अलग-अलग राज्यों में अलग तारीखों पर मनाया जाता है। कहीं यह चैत्र मास से शुरू होता है, तो कहीं सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ नया साल माना जाता है।

चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष करीब 365 दिनों का होता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हिंदू कैलेंडर में समय-समय पर अतिरिक्त महीना (अधिक मास) जोड़ा जाता है, जिससे त्योहार और मौसम एक साथ बने रहें।

विशेषज्ञों के अनुसार, यही कारण है कि हर साल हिंदू नववर्ष की तारीख बदलती रहती है, जबकि अंग्रेजी नववर्ष 1 जनवरी को स्थिर रहता है। भारतीय परंपरा में नववर्ष को प्रकृति, मौसम और खगोलीय घटनाओं से जोड़कर देखा जाता है, न कि केवल कैलेंडर की तारीख से।

इस तरह पृथ्वी की गति, सूर्य-चंद्रमा की स्थिति और प्राचीन गणनाओं के आधार पर ही हिंदू नववर्ष की तारीख तय होती है, जो इसे वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दोनों रूप से खास बनाती है।