2010 नक्सली हमले केस में सभी आरोपी बरी, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा- सबूत और जांच दोनों कमजोर
By : hashtagu, Last Updated : May 8, 2026 | 12:25 am
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साल 2010 के चर्चित ताड़मेटला नक्सली हमले (Naxal Attack) मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 10 आरोपियों की बरी होने की याचिका को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में प्रत्यक्ष सबूत (Direct Evidence) नहीं थे और जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। इसी वजह से आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित नहीं हो सका।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसियां आरोपियों के खिलाफ संदेह से परे अपराध साबित करने में नाकाम रहीं।
यह मामला 6 अप्रैल 2010 को दंतेवाड़ा के ताड़मेटला इलाके में हुए देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक से जुड़ा है। उस समय सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन और राज्य पुलिस के जवान एरिया डोमिनेशन ऑपरेशन पर निकले थे, तभी घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने हमला कर दिया था। इस हमले में 75 सीआरपीएफ जवान और एक राज्य पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। बाद में इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान कई प्रक्रियात्मक चूक हुईं और परिस्थितिजन्य सबूतों की कड़ी भी पूरी तरह स्थापित नहीं हो सकी। अदालत ने यह भी माना कि अपराध बेहद गंभीर था, लेकिन केवल गंभीरता के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
कोर्ट ने राज्य सरकार और जांच एजेंसियों को भविष्य में ऐसे मामलों में बेहतर जांच और कानूनी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करने की सलाह भी दी है। फैसले के बाद एक बार फिर नक्सल मामलों में जांच की गुणवत्ता और अभियोजन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।




