छत्तीसगढ़ के नए DGP बने अरुण देव गौतम, अमित शाह के दौरे से पहले सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला

By : hashtagu, Last Updated : May 16, 2026 | 2:03 pm

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम (Arun Dev Gautam) को राज्य का पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का छत्तीसगढ़ दौरा प्रस्तावित है। ऐसे में इस नियुक्ति को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

1992 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम अभी तक प्रभारी डीजीपी (Acting DGP) के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब राज्य सरकार ने उन्हें स्थायी तौर पर पुलिस विभाग की कमान सौंप दी है। अरुण देव गौतम को तेज-तर्रार (Dynamic), सख्त प्रशासनिक शैली और नक्सल प्रभावित इलाकों में मजबूत पकड़ रखने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है। उनके नेतृत्व में राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था को और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

अरुण देव गौतम का प्रशासनिक अनुभव काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है। मध्यप्रदेश और बाद में छत्तीसगढ़ कैडर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद उन्होंने नए राज्य कैडर को चुना और तब से लगातार महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते रहे हैं।

अपने करियर के दौरान उन्होंने कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में सेवाएं दी हैं। इन जिलों में कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर उनके काम की काफी सराहना हुई थी।

सूत्रों के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही आने वाले समय में नक्सल विरोधी अभियान को और तेज करने की तैयारी में हैं। ऐसे में अरुण देव गौतम की नियुक्ति को रणनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित दौरे से पहले राज्य सरकार पुलिस नेतृत्व को मजबूत संदेश देना चाहती थी।

अरुण देव गौतम की पहचान एक अनुशासित, जमीनी और परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में रही है। पुलिस विभाग के भीतर भी उनकी छवि एक सख्त लेकिन पेशेवर अधिकारी की मानी जाती है। अब उनके सामने राज्य में कानून व्यवस्था को और बेहतर बनाना, साइबर अपराधों पर नियंत्रण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने जैसी बड़ी चुनौतियां रहेंगी।