मध्यप्रदेश में UCC पर बड़ा कदम, मानसून सत्र में आएगा विधेयक; जनजातीय समुदाय रहेगा दायरे से बाहर
By : hashtagu, Last Updated : June 17, 2026 | 2:44 pm
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार आगामी विधानसभा मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार कई महत्वपूर्ण और समसामयिक मुद्दों के साथ सत्र में प्रवेश कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि बाबा महाकाल की कृपा से समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) विधेयक इसी सत्र में पारित (Passed) होगा। मुख्यमंत्री ने इसे ‘एक देश, एक कानून’ की भावना से जोड़ते हुए कहा कि मध्यप्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है और इसे मानसून सत्र में विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की सोच में कुछ भी गलत नहीं है और इसका उद्देश्य समाज में समानता तथा न्याय को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे राज्यों में समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा चुके हैं। मध्यप्रदेश भी अब इस दिशा में आगे बढ़ रहा है और जल्द ही इस कानून को लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो सकता है।
सरकार ने UCC के अध्ययन और सुझावों के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। यह समिति प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर अलग-अलग वर्गों, संगठनों और समुदायों से राय ले रही है, ताकि व्यापक सहमति के आधार पर कानून तैयार किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनजातीय समुदायों को समान नागरिक संहिता के दायरे से अलग रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को पूरी स्वतंत्रता और संरक्षण दिया जाएगा। अन्य राज्यों में भी इस तरह के प्रावधान किए गए हैं और मध्यप्रदेश में भी उसी मॉडल पर विचार किया जा रहा है।
सरकार ने आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष वेबसाइट भी शुरू की है। इसके माध्यम से लोग अपने सुझाव और विचार सरकार तक पहुंचा सकते हैं, जिससे नीति निर्माण की प्रक्रिया में जनभागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में विवाह, पारिवारिक मामलों और अन्य नागरिक विषयों के लिए अलग-अलग धर्मों के अलग कानूनों की आवश्यकता नहीं है। समान नागरिक संहिता से समाज में एकरूपता, समान अधिकार और न्याय की भावना को मजबूती मिलेगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में किसी भी परीक्षार्थी को परेशानी न हो और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने तथा जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों को वाहन सुविधा उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग दिवस और नीट परीक्षा एक ही दिन होने के कारण प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। दोनों कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
प्रदेश में नीट परीक्षा 30 जिलों के 283 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। परीक्षा की अवधि 3 घंटे 20 मिनट निर्धारित की गई है। परीक्षार्थियों को निर्धारित नियमों के अनुसार अतिरिक्त समय की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। सरकार का दावा है कि परीक्षा के सफल और सुचारू आयोजन के लिए सभी केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं और बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।




