भाजपा की नई राजनीतिक इंजीनियरिंग क्या है? 2029 की तैयारी में बदल रहा है सत्ता का समीकरण
By : hashtagu, Last Updated : June 22, 2026 | 10:54 pm
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) देश की राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए नई राजनीतिक इंजीनियरिंग (Political Engineering) और सामाजिक समीकरण (Social Equation) पर काम कर रही है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक निलंजन मुखोपाध्याय के अनुसार, भाजपा अब केवल पारंपरिक हिंदुत्व (Hindutva) राजनीति पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि विभिन्न सामाजिक समूहों, जातियों और क्षेत्रों को अपने साथ जोड़कर दीर्घकालिक राजनीतिक बढ़त हासिल करने की रणनीति अपना रही है।
लेख में कहा गया है कि भाजपा का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं बल्कि कई राज्यों में ऐसी राजनीतिक संरचना तैयार करना है, जहां विपक्ष के लिए वापसी करना बेहद मुश्किल हो जाए। पार्टी विभिन्न राज्यों में स्थानीय सामाजिक समीकरणों के अनुसार अपनी रणनीति बदल रही है और नए वर्गों को संगठन तथा सत्ता ढांचे में जगह देकर अपना जनाधार बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
विश्लेषण के अनुसार भाजपा की यह रणनीति पहले हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में दिखाई दे चुकी है, जहां सामाजिक और जातीय समीकरणों को नए तरीके से साधकर पार्टी ने चुनावी लाभ हासिल किया। अब पार्टी इसी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
निलंजन मुखोपाध्याय का मानना है कि भाजपा का संगठनात्मक ढांचा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मजबूत नेटवर्क पार्टी को अन्य दलों की तुलना में अतिरिक्त बढ़त देता है। यही कारण है कि भाजपा लगातार नए सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने और विपक्ष की संभावित एकजुटता को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है।
लेख में यह भी संकेत दिया गया है कि आने वाले वर्षों में भाजपा की राजनीति केवल वैचारिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय नेतृत्व और नए राजनीतिक गठबंधनों पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। 2029 के लोकसभा चुनाव और विभिन्न राज्यों के चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी अभी से अपने राजनीतिक आधार को और व्यापक बनाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की यह नई राजनीतिक इंजीनियरिंग आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विपक्ष इसके मुकाबले कितनी प्रभावी रणनीति तैयार कर पाता है और जनता इन प्रयासों को किस रूप में स्वीकार करती है।




