शिवसेना UBT के संपर्क में हैं बागी सांसद! संजय राउत का दावा- जनता के गुस्से से डरे, दो सांसदों से बातचीत जारी

By : hashtagu, Last Updated : June 21, 2026 | 7:18 pm

मुंबई (महाराष्ट्र): शिवसेना (यूबीटी) नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने दावा किया है कि पार्टी के कुछ बागी सांसद अब भी शिवसेना (यूबीटी) के संपर्क में हैं और अपने संसदीय क्षेत्रों में जनता के गुस्से से डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि कम से कम दो सांसदों के साथ बातचीत जारी है और यदि उन्हें लगता है कि उनसे गलती हुई है तो पार्टी उनसे चर्चा करने के लिए तैयार है।

रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए संजय राउत ने कहा कि कुछ सांसद लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने दावा किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के विरोध और नाराजगी के कारण ये सांसद असहज महसूस कर रहे हैं। राउत ने कहा कि पार्टी के साथ उनकी बातचीत चल रही है और आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर भी हमला बोला, जिसमें उन्होंने कहा था कि अब कोई गुट नहीं बचा है और केवल एक ही शिवसेना है, जिसका नेतृत्व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं। राउत ने आरोप लगाया कि यह बयान शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे और महाराष्ट्र की जनता का अपमान है। उन्होंने कहा कि असली शिवसेना आज भी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में है और जितना अधिक शिवसेना (यूबीटी) का अपमान किया जाएगा, उतना ही महाराष्ट्र की जनता उसके खिलाफ खड़ी होगी।

राउत ने कहा कि तकनीकी रूप से सभी बागी सांसद अभी भी शिवसेना (यूबीटी) का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से कोई आदेश जारी नहीं हुआ है और न ही शिंदे गुट ने आधिकारिक रूप से इन सांसदों के अपनी पार्टी में शामिल होने की घोषणा की है। राउत के अनुसार, इन सांसदों ने शिवसेना (यूबीटी) छोड़ने की सार्वजनिक घोषणा भी नहीं की है, हालांकि उन्होंने पार्टी की संसदीय बैठक में शामिल न होकर व्हिप का उल्लंघन जरूर किया है।

गौरतलब है कि 17 जून को दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में सांसद संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल नहीं हुए थे। इसके बाद से ही उनके एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में जाने की अटकलें तेज हो गई थीं।

लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं। दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागी खेमे को कम से कम छह सांसदों यानी दो-तिहाई संख्या की जरूरत होगी। ऐसे में इन सांसदों के रुख पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

इस बीच महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश महाजन ने भी संजय राउत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब इंतजार करना होगा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) राउत के घर कब पहुंचती हैं। महाजन की यह टिप्पणी राउत के उस बयान के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर उनके पास केंद्रीय जांच एजेंसियों का नियंत्रण होता तो भाजपा के सबसे पहले दल बदलने वाले नेता गिरीश महाजन होते।

महाजन ने कहा कि एक तरफ शिवसेना (यूबीटी) कहती है कि जिसे जाना है वह चला जाए, लेकिन अगले ही दिन उन्हीं लोगों के प्रति नरम रुख अपना लिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे से लोग निराश हो चुके हैं और लगातार उनका साथ छोड़ रहे हैं।

गिरीश महाजन के बयान पर पलटवार करते हुए संजय राउत ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के आने का इंतजार करने में कोई नुकसान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों को पहले भी उनके घर भेजा गया था और वे सत्ता के इशारे पर काम कर रही हैं। राउत ने कहा कि जब किसी के घर ईडी और सीबीआई पहुंचती है तो कई नेता या तो छिप जाते हैं, राजनीतिक दल बदल लेते हैं या फिर दबाव में आ जाते हैं, लेकिन वह ऐसे दबाव से डरने वाले नहीं हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) और शिंदे गुट के बीच जारी खींचतान के बीच बागी सांसदों को लेकर बढ़ी हलचल ने राज्य की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है। आने वाले दिनों में इन सांसदों का अंतिम फैसला महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।