राहुल गांधी ने जिलाध्यक्षों को दिखाया CM बनने का सपना, बोले- अगला भूपेश, टीएस या महंत आप में से कोई हो सकता है

By : hashtagu, Last Updated : June 23, 2026 | 8:56 pm

अभनपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अभनपुर प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का करीब चार घंटे का दौरा कई अहम राजनीतिक संदेश छोड़ गया। बंद कमरे में जिलाध्यक्षों, वरिष्ठ नेताओं और संगठन पदाधिकारियों के साथ हुई बैठकों में राहुल गांधी ने साफ संकेत दिए कि पार्टी अब केवल पुराने चेहरों पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि नए नेतृत्व को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी का सबसे ज्यादा फोकस जिलाध्यक्षों पर रहा। उन्होंने करीब ढाई घंटे तक प्रदेश के 41 जिलाध्यक्षों के साथ चर्चा की। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने तीन जिलाध्यक्षों को उदाहरण के तौर पर खड़ा किया और कहा कि यदि संगठन के लिए ईमानदारी और समर्पण के साथ काम किया जाए तो पार्टी किसी भी कार्यकर्ता को बड़ी जिम्मेदारी देने से पीछे नहीं हटेगी।

उन्होंने कहा कि भविष्य का भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव या चरणदास महंत इसी कतार से निकल सकता है। राहुल गांधी के इस बयान को कांग्रेस संगठन में नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक के दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि राजनीतिक भविष्य दिल्ली में लॉबिंग करने से नहीं, बल्कि जिलों में किए गए काम और जनता के बीच सक्रियता से तय होगा। उन्होंने जिलाध्यक्षों को जनता के बीच लगातार मौजूद रहने और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया। राहुल ने कहा कि पार्टी उन्हीं नेताओं को आगे बढ़ाएगी जो जमीन पर काम करेंगे और लोगों के मुद्दों से जुड़े रहेंगे।

राहुल गांधी ने बैठकों में गुटबाजी और सार्वजनिक बयानबाजी के मुद्दे पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं को साफ संदेश दिया कि मीडिया के जरिए एक-दूसरे पर हमला करने से संगठन कमजोर होता है और इसका सीधा राजनीतिक फायदा भाजपा को मिलता है। उन्होंने नेताओं को आपसी समन्वय बढ़ाने और सार्वजनिक मंचों पर एकजुटता दिखाने की सलाह दी।

अभनपुर पहुंचने के बाद राहुल गांधी ने सबसे पहले प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत समेत कई वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मौजूद रहे। इसके बाद उन्होंने पूर्व विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के अलग प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। दोनों बैठकों में संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार राहुल गांधी का इस बार फोकस केवल चुनावी रणनीति पर नहीं बल्कि संगठनात्मक अनुशासन, कार्यकर्ताओं के मनोबल और नए नेतृत्व के निर्माण पर ज्यादा रहा। उन्होंने संगठन के हर स्तर पर जवाबदेही और सक्रियता बढ़ाने की बात कही।

अभनपुर का यह प्रशिक्षण शिविर कांग्रेस के लिए सिर्फ एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा है। पार्टी इसे 2028 विधानसभा चुनाव की शुरुआती तैयारी के रूप में देख रही है। शिविर में जिलाध्यक्षों को गांवों में रुकने, ग्रामीणों से सीधे संवाद करने, मनरेगा की स्थिति समझने और नशे जैसी सामाजिक समस्याओं पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा योग, मार्शल आर्ट्स और नेतृत्व विकास से जुड़े सत्रों के माध्यम से उन्हें जमीनी राजनीति के लिए तैयार किया जा रहा है।

प्रशिक्षण शिविर में आगामी जन आंदोलनों की रणनीति पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस आदिवासी क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन के मुद्दों को लेकर बड़े अभियान की तैयारी कर रही है। जिलाध्यक्षों को स्थानीय मुद्दों की पहचान कर उन्हें संगठन के एजेंडे में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी का मानना है कि जमीनी आंदोलनों के जरिए जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई जा सकती है।

राहुल गांधी के इस दौरे से तीन बड़े संदेश निकलकर सामने आए हैं। पहला, कांग्रेस में आगे बढ़ने का रास्ता अब केवल वरिष्ठता नहीं बल्कि प्रदर्शन और जमीनी काम से तय होगा। दूसरा, गुटबाजी और सार्वजनिक बयानबाजी को पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी। तीसरा, कांग्रेस अब नए नेतृत्व को तैयार करने के मिशन पर गंभीरता से काम कर रही है।

राजनीतिक गलियारों में राहुल गांधी के इस संदेश को संगठन में नई पीढ़ी के नेताओं को आगे लाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। जिलाध्यक्षों के साथ लंबी चर्चा और उन्हें भविष्य का बड़ा नेता बनने की संभावना बताकर राहुल गांधी ने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में कांग्रेस की राजनीति में नए चेहरे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।