महासमुंद बना जल संरक्षण की मिसाल, 15 दिन में ग्रामीणों ने बचाया 31 करोड़ लीटर पानी
By : hashtagu, Last Updated : July 11, 2026 | 10:37 am
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले (Mahasamund) ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है। जिले में ‘मेरा गांव, मेरा पानी 2.0’ (My Village, My Water 2.0) अभियान के तहत ग्रामीणों ने महज 15 दिनों में श्रमदान कर 31 करोड़ लीटर (310 Million Litres) वर्षा जल का संरक्षण किया। मानसून की पहली बारिश के साथ यह पानी गांवों में ही सुरक्षित हो गया, जो पहले नालों और नदियों में बह जाता था।
महासमुंद जिला लंबे समय से जल संकट और लगातार गिरते भूजल स्तर की समस्या से जूझ रहा था। खरीफ और रबी दोनों सीजन में बड़े पैमाने पर धान की खेती होने के कारण भूजल पर दबाव लगातार बढ़ता गया। इसका असर यह हुआ कि हर गर्मी में जिले के कई इलाकों में पानी की गंभीर कमी होने लगी। इस चुनौती से निपटने के लिए जिला प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का फैसला किया।
‘मेरा गांव, मेरा पानी 2.0’ अभियान के तहत जिले की 551 ग्राम पंचायतों और 1,140 से अधिक गांवों में भूजल रिचार्ज और वर्षा जल संचयन के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। लाखों ग्रामीणों ने स्वेच्छा से श्रमदान कर गांवों में जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया। अभियान का उद्देश्य वर्षा जल को गांवों में ही रोकना, भूजल स्तर बढ़ाना और भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
अभियान के दौरान केवल 15 दिनों में 3.41 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं। इनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट, सोक पिट, ट्रेंच, चेक डैम, तालाब और कुएं शामिल हैं। इन संरचनाओं का निर्माण ग्रामीणों की भागीदारी और कृषि, वन, जिला पंचायत तथा जनपद पंचायत समेत विभिन्न विभागों के समन्वय से किया गया।
अभियान का असर मानसून की पहली बारिश में ही दिखाई देने लगा। 14 मई से 30 मई के बीच जिले में करीब 31 करोड़ लीटर वर्षा जल का संरक्षण हुआ। इससे भूजल स्तर रिचार्ज होने के साथ भविष्य में जल संकट कम करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली।
अरंड ग्राम पंचायत के निवासी शंकर लाल यादव ने बताया कि ग्राम सभा में जल संकट पर चर्चा के बाद हर घर में सोक पिट बनाने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने मिलकर यह काम पूरा किया और अब लगभग हर घर में सोक पिट होने से वर्षा का पानी जमीन में समाकर भूजल को रिचार्ज कर रहा है।
महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने बताया कि ‘मेरा गांव, मेरा पानी 2.0’ अभियान की सफलता का सबसे बड़ा कारण आम लोगों की सक्रिय भागीदारी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जल संरक्षण-जन भागीदारी’ के विजन से प्रेरित इस अभियान ने साबित कर दिया कि जब प्रशासन और जनता साथ मिलकर काम करते हैं तो जल संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्य भी आसानी से हासिल किए जा सकते हैं।



