छत्तीसगढ़ बनेगा बायोगैस हब, हर साल 1.65 लाख मीट्रिक टन CBG उत्पादन से 1188 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचेगी
By : hashtagu, Last Updated : July 12, 2026 | 11:29 am
रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ में हर साल 1.65 लाख मीट्रिक टन कम्प्रेस्ड बायोगैस (Compressed Biogas-CBG) के उत्पादन की क्षमता है। इससे राज्य हर वर्ष पेट्रोल और डीजल के बराबर ईंधन (Fuel) की आपूर्ति कर सकेगा और करीब 1,188 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) की बचत होगी। छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सुमित सरकार ने बताया कि राज्य में कृषि अवशेष, धान का पैरा, गोबर, पशुधन अपशिष्ट, नगर निगम के ठोस कचरे, गन्ने के अवशेष और नेपियर घास जैसे जैविक संसाधनों से बड़े पैमाने पर सीबीजी का उत्पादन किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस उत्पादन से राज्य करीब 2,16,810 टन पेट्रोल और डीजल के बराबर ईंधन उपलब्ध करा सकेगा। इससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत होगी। यह पहल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगी।
सुमित सरकार ने कहा कि कृषि अवशेष, धान के पैरे और अन्य बायोमास के उपयोग से किसानों की आय में भी हर साल करीब 16.50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। वहीं, सीबीजी संयंत्रों से निकलने वाले जैविक उर्वरक के उपयोग से प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी।
उन्होंने कहा कि कम्प्रेस्ड बायोगैस के बढ़ते उपयोग से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। यह पहल छत्तीसगढ़ को स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास और नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राज्य सरकार की सीजी-सीबीजी नीति के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।




