छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र में जल जीवन मिशन से लेकर कानून-व्यवस्था तक सरकार पर होगा हमला
By : hashtagu, Last Updated : July 14, 2026 | 12:28 pm
रायपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) विधानसभा (Assembly) के मानसून सत्र (Monsoon Session) के दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू हो गई। प्रश्नकाल (Question Hour) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक भैय्यालाल राजवाड़े ने जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) को लेकर जानकारी मांगी। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) डॉ. रमन सिंह ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “सचिन तेंदुलकर बहुत दिनों बाद बैटिंग के लिए उतरे हैं, पुराने खिलाड़ी हैं।” उनकी इस टिप्पणी के बाद सदन में कुछ देर के लिए मुस्कुराहट का माहौल बन गया।
सदन में रायपुर की पेयजल व्यवस्था, अमृत मिशन, जल जीवन मिशन, टैंकरों से पानी की आपूर्ति, अधूरी योजनाओं और अवैध नल कनेक्शनों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और सवाल-जवाब देखने को मिले।
वहीं, कांग्रेस आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी। राज्य गठन के बाद विधानसभा में यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव होगा। सदन की आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तारीख तय करेंगे।
प्रश्नकाल के दौरान जल जीवन मिशन, रायपुर की पेयजल व्यवस्था, औद्योगिक दुर्घटनाएं, शराब दुकानें, सरकारी आयोजनों में खर्च और प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों सहित कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
अविश्वास प्रस्ताव केवल सरकार गिराने की प्रक्रिया नहीं होता, बल्कि इसके माध्यम से विपक्ष सरकार के पूरे कार्यकाल के कामकाज, नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाता है। वहीं सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब देता है। चर्चा के बाद मतदान होता है और यदि सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है तो प्रस्ताव स्वतः खारिज हो जाता है।
इस बार कांग्रेस नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और विभिन्न प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। दूसरी ओर भाजपा सरकार अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों को सदन में रखेगी।
विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 35 सदस्य हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का एक विधायक भी सदन में है। ऐसे में संख्या बल भाजपा के पक्ष में है और इसी कारण अविश्वास प्रस्ताव का राजनीतिक महत्व अधिक माना जा रहा है, जबकि सरकार के बहुमत पर किसी तरह का खतरा नहीं दिख रहा है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में इससे पहले नौ बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं। वर्ष 2002 और 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सरकार के खिलाफ भाजपा ने दो बार प्रस्ताव पेश किया था। इसके बाद डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ 2007, 2011, 2015, 2017 और 2018 में कांग्रेस ने पांच बार अविश्वास प्रस्ताव लाया। वहीं भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ 2022 और 2023 में भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। सभी मामलों में संबंधित सरकारें सदन में बहुमत साबित करने में सफल रहीं।
जुलाई 2023 के मानसून सत्र में भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ भाजपा ने 109 बिंदुओं का आरोप-पत्र पेश करते हुए अविश्वास प्रस्ताव लाया था, लेकिन कांग्रेस के बहुमत के चलते वह ध्वनिमत से खारिज हो गया। वहीं, जुलाई 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 24 घंटे 25 मिनट तक चली चर्चा अब तक विधानसभा के इतिहास की सबसे लंबी बहस मानी जाती है। मंगलवार को विष्णु देव साय सरकार के खिलाफ पेश किया जाने वाला अविश्वास प्रस्ताव राज्य गठन के बाद 10वां होगा।




