छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सर्जरी पर सियासी घमासान, दो साल में एक दर्जन से ज्यादा OSD और PA हटाए गए

By : hashtagu, Last Updated : January 6, 2026 | 5:36 pm

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों मंत्रियों (Chattisgarh ministers) के निजी स्टाफ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी सरकार के करीब दो साल के कार्यकाल में अब तक एक दर्जन से अधिक ओएसडी (OSD) और पीए-पीएस (PA-PS) को पद से हटाया जा चुका है। ताजा मामला राजस्व और उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा के निजी स्टाफ से जुड़ा है, जहां अचानक कार्रवाई के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। मंत्रियों के स्टाफ में लगातार हो रहे बदलाव को लेकर विपक्ष हमलावर है, जबकि सरकार इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है।

कांग्रेस ने इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यह सिर्फ अधिकारियों को हटाने का मामला नहीं है, बल्कि कमीशन और बंदरबांट को लेकर अंदरूनी खींचतान का नतीजा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सब कुछ पारदर्शी है तो बार-बार स्टाफ बदलने की जरूरत क्यों पड़ रही है, जरूर दाल में कुछ काला है।

कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने भी तीखा पलटवार किया है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि यह पूरी तरह प्रशासनिक फैसला है और सरकार कामकाज को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए समय-समय पर ऐसे बदलाव करती रहती है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो खुद भ्रष्टाचार में डूबे रहे हैं, उन्हें हर जगह खोट नजर आता है।

मंत्रियों के खास माने जाने वाले अधिकारियों को लगातार हटाए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इसे सुशासन की दिशा में उठाया गया कदम माना जाए या फिर इसके पीछे कोई और वजह है, इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। फिलहाल ओएसडी और पीए-पीएस की इस ‘प्रशासनिक सर्जरी’ ने छत्तीसगढ़ की सियासत को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।