रायपुर (छत्तीसगढ़): देश में नक्सलवाद (Naxalism) के खात्मे की तय समयसीमा 31 मार्च 2026 (Deadline) जैसे-जैसे करीब आ रही है, सुरक्षा बलों (Security Forces) ने बड़े पैमाने पर ऑपरेशन (Operation) तेज कर दिए हैं। सरकार का दावा है कि देश में लाल आतंक (Red Terror) अब अंतिम चरण में है और जल्द ही इस पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय की गई इस डेडलाइन के तहत पिछले दो वर्षों से मिशन मोड में अभियान चलाया जा रहा है। खासतौर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई तेज की है, जहां अब नक्सल प्रभाव काफी सीमित हो गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पहले जहां राज्य में 30 से ज्यादा सक्रिय नक्सल एरिया कमेटियां थीं, अब यह घटकर सिर्फ 4 रह गई हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अंतिम लड़ाई इन्हीं इलाकों में चल रही है, जहां अब भी कुछ सशस्त्र नक्सली सक्रिय हैं।
जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच 2500 से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जबकि सैकड़ों मारे गए और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां भी हुई हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि नक्सल नेटवर्क तेजी से कमजोर हुआ है और संगठन का ढांचा टूट रहा है।
सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना के सीमावर्ती इलाकों में संयुक्त अभियान शुरू किए हैं। अंतिम दिनों में बड़े ऑपरेशन चलाकर बचे हुए 100-150 हार्डकोर नक्सलियों को पकड़ने या सरेंडर कराने की रणनीति बनाई गई है।
बस्तर क्षेत्र को लेकर सरकार का दावा है कि करीब 96 प्रतिशत इलाका अब नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुका है और बाकी बचे इलाकों में भी जल्द सफलता मिलने की उम्मीद है।
हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि 31 मार्च के बाद भी पूरी तरह सतर्कता बरतनी होगी, क्योंकि कुछ शीर्ष नक्सली नेता अब भी सक्रिय हैं। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ एक लक्ष्य तिथि है, लेकिन ऑपरेशन तब तक जारी रहेंगे जब तक पूरी तरह शांति स्थापित नहीं हो जाती।
देश में दशकों से चल रहे नक्सलवाद के खिलाफ यह सबसे बड़ा और निर्णायक अभियान माना जा रहा है। अगर 31 मार्च तक घोषित लक्ष्य हासिल होता है, तो यह भारत की आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में एक बड़ा बदलाव साबित होगा।