भोजशाला से ‘मां सरस्वती लोक’ तक: धार में राजा भोज की विरासत को नया जीवन देने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने सोमवार को धार स्थित भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद घोषणा की कि राज्य सरकार यहां भव्य “मां सरस्वती लोक” का निर्माण कराएगी।

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  • Publish Date - May 26, 2026 / 09:51 PM IST

धार: जिस भोजशाला (Bhojshala) को परमार राजा भोज ने सदियों पहले ज्ञान और विद्या के केंद्र के रूप में स्थापित किया था, अब उसी ऐतिहासिक धरोहर को नए स्वरूप में पुनर्जीवित (Revive) करने की तैयारी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला परिसर को मां सरस्वती को समर्पित मंदिर घोषित किए जाने के करीब दस दिन बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार पहुंचकर बड़े सांस्कृतिक (Cultural) और विकासात्मक (Developmental) ऐलान किए।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को धार स्थित भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद घोषणा की कि राज्य सरकार यहां भव्य “मां सरस्वती लोक” का निर्माण कराएगी। साथ ही धार में “राजा भोज रिसर्च इंस्टीट्यूट” भी स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करेगी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई के समन्वय से भोजशाला की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को फिर से जीवंत करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।

दरअसल 15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में भोजशाला परिसर को मां सरस्वती को समर्पित हिंदू मंदिर माना था। इस फैसले के बाद वह पुरानी व्यवस्था प्रभावी रूप से समाप्त हो गई, जिसके तहत एएसआई के निर्देशों के अनुसार मंगलवार को हिंदू पक्ष पूजा करता था और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष नमाज अदा करता था। हाईकोर्ट के इस फैसले से असहमत मुस्लिम पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि धार के व्यापक विकास रोडमैप से भी जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि राजा भोज की इस पावन भूमि पर अब विरासत संरक्षण, जल संरक्षण और औद्योगिक विकास की नई धारा एक साथ बहेगी। उन्होंने राजा भोज को जल प्रबंधन का अग्रदूत बताते हुए कहा कि धार कभी “तालाबों की नगरी” के रूप में प्रसिद्ध थी और यहां बारह-साढ़े बारह तालाबों की ऐसी व्यवस्था बनाई गई थी, जिससे पूरे क्षेत्र का जल संतुलन बना रहता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब धार की ऐतिहासिक पहचान को आधुनिक विकास से जोड़ते हुए आगे बढ़ाना चाहती है। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में भोजशाला और उससे जुड़ी विरासत को पर्यटन, संस्कृति और शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। “मां सरस्वती लोक” और “राजा भोज रिसर्च इंस्टीट्यूट” को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राजनीतिक रूप से भी इस घोषणा को काफी अहम माना जा रहा है। भोजशाला का मुद्दा लंबे समय से मध्य प्रदेश की राजनीति और धार्मिक विमर्श का केंद्र रहा है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार के इस बड़े ऐलान ने धार को फिर से राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।