गोंचा महापर्व की तैयारियां अंतिम चरण में, श्रद्धा और परंपरा के प्रतीक रथ को दिया जा रहा अंतिम रूप

रथ निर्माण में पारंपरिक शिल्पकला और बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को विशेष रूप से उकेरा जा रहा है, जिससे महापर्व की भव्यता और अधिक बढ़ेगी।

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  • Publish Date - July 14, 2026 / 12:22 PM IST

जगदलपुर (छत्तीसगढ़): बस्तर की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक गोंचा महापर्व की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ जारी हैं। गोंचा महापर्व (Goncha Mahaparv) को लेकर रथ (Chariot) निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। कुशल कारीगर (Skilled Artisans) श्रद्धा और समर्पण के साथ दिन-रात रथ को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।

महापर्व के दौरान यह भव्य रथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा। रथ निर्माण में पारंपरिक शिल्पकला और बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को विशेष रूप से उकेरा जा रहा है, जिससे महापर्व की भव्यता और अधिक बढ़ेगी।

रथ निर्माण में पारंपरिक शिल्पकला और बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को विशेष रूप से उकेरा जा रहा है, जिससे महापर्व की भव्यता और अधिक बढ़ेगी।

गोंचा महापर्व बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष इस पर्व में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होते हैं। प्रशासन और आयोजन समिति भी महापर्व की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है, ताकि आयोजन पारंपरिक गरिमा और भव्यता के साथ संपन्न हो सके।