विधानसभा में गिग वर्कर्स के अधिकारों पर सरकार घिरी, स्पष्ट नीति न होने की बात स्वीकार
By : hashtagu, Last Updated : February 25, 2026 | 10:59 pm
By : hashtagu, Last Updated : February 25, 2026 | 10:59 pm
रायपुर, 25 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गिग वर्कर्स (Gig Workers), प्लेटफॉर्म वर्कर्स (Platform Workers) और डिलीवरी पार्टनर्स (Delivery Partners) के अधिकारों को लेकर सदन में जोरदार बहस हुई। स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट और रैपिडो जैसी कंपनियों से जुड़े युवाओं की सुरक्षा (Safety), सामाजिक सुरक्षा (Social Security) और श्रमिक अधिकार (Labour Rights) का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार से सवाल किया कि इन गिग वर्कर्स को संगठित श्रमिक माना जाएगा या असंगठित श्रमिक की श्रेणी में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि तेज डिलीवरी के दबाव में काम करने वाले इन युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि क्या गिग वर्कर्स से जुड़े हादसों या आत्महत्या के मामलों का कोई डेटा सरकार के पास उपलब्ध है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल राज्य स्तर पर गिग वर्कर्स को न तो संगठित और न ही असंगठित श्रमिक की स्पष्ट श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए नियम बनाने का प्रावधान केंद्र सरकार के स्तर पर है। राज्य सरकार केंद्र द्वारा बनाए जाने वाले नियमों के अनुसार ही आगे कार्रवाई करेगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि इस विषय पर पहले एक समिति गठित की गई थी, लेकिन अभी तक राज्य स्तर पर अलग से कोई नियम लागू नहीं किया गया है। इस पर विपक्ष ने असंतोष जताते हुए कहा कि स्पष्ट नीति नहीं होने से हजारों गिग वर्कर्स बिना सुरक्षा कवच के काम करने को मजबूर हैं।
सदन में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के बाद यह स्पष्ट हुआ कि छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ रहे गिग इकोनॉमी सेक्टर में काम कर रहे युवाओं के लिए ठोस नीति और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है।