छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तय सीमा से अधिक शराब होने का पुख्ता सबूत बिना वाहन जब्त नहीं किया जा सकता
By : hashtagu, Last Updated : June 30, 2026 | 8:17 pm
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आबकारी (Excise) मामलों में वाहन जब्ती (Vehicle Confiscation) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि केवल अनुमान के आधार पर किसी वाहन को जब्त नहीं किया जा सकता। जब तक सक्षम प्राधिकारी के पास यह साबित करने के लिए विश्वसनीय साक्ष्य (Evidence) नहीं हो कि जब्त की गई शराब (Liquor) की मात्रा कानूनी सीमा से अधिक है, तब तक वाहन की जब्ती का आदेश वैध नहीं माना जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकल पीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। मामला एक स्कॉर्पियो वाहन से जुड़ा था, जिसे छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत अवैध शराब के परिवहन के आरोप में जब्त किया गया था। बाद में कलेक्टर ने धारा 47-ए के तहत वाहन जब्त करने का आदेश दिया था और आबकारी आयुक्त ने भी उस आदेश को बरकरार रखा था। हालांकि, सत्र न्यायालय ने वाहन जब्ती का आदेश निरस्त कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार हाईकोर्ट पहुंची थी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि वाहन से निर्धारित सीमा से अधिक शराब का परिवहन किया जा रहा था, इसलिए वाहन की जब्ती पूरी तरह कानून के अनुरूप थी। वहीं हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि कुल 154 बोतलें जब्त होने का दावा किया गया था, लेकिन इनमें से केवल आठ 180 मिलीलीटर की बोतलों और एक 650 मिलीलीटर की बोतल की ही जांच आबकारी अधिकारी ने की थी। यानी करीब 2.09 लीटर शराब की ही पुष्टि हुई थी। शेष बोतलों के संबंध में न तो फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट थी और न ही किसी सक्षम प्राधिकारी का प्रमाण कि उनमें भी शराब ही थी।
अदालत ने कहा कि बिना वैज्ञानिक जांच के यह मान लेना कि सभी 154 बोतलों में शराब थी और उसकी कुल मात्रा पांच बल्क लीटर से अधिक थी, कानूनन स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वाहन की जब्ती संपत्ति के अधिकार को प्रभावित करने वाली गंभीर कार्रवाई है, इसलिए कानून में निर्धारित सभी शर्तों का सख्ती से पालन होना जरूरी है। केवल अनुमान के आधार पर जब्ती का आदेश नहीं दिया जा सकता।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि सत्र न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया था, जबकि कलेक्टर और आबकारी आयुक्त ने पर्याप्त सबूत के बिना यह मान लिया था कि सभी जब्त बोतलों में शराब थी। इसी आधार पर अदालत ने राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए सत्र न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा।




