छत्तीसगढ़ सामूहिक विवाह योजना में मंगलसूत्र विवाद, जांच में चांदी नहीं ‘गिलेट’ धातु मिलने की पुष्टि

By : hashtagu, Last Updated : July 6, 2026 | 4:37 pm

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना (Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana) के तहत आयोजित सामूहिक विवाह (Mass Marriage) कार्यक्रम में नवविवाहित महिलाओं को दिए गए मंगलसूत्र (Mangalsutra) की गुणवत्ता पर उठे विवाद में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि जिन मंगलसूत्रों को चांदी का बताया गया था, वे चांदी के नहीं बल्कि ‘गिलेट’ (Gillet Alloy) नामक मिश्रधातु (Alloy) से बने थे। मामले की जांच जारी है और सरकार ने पूरी खरीद प्रक्रिया की समीक्षा शुरू कर दी है।

यह मामला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले का है, जहां 10 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 184 आर्थिक रूप से कमजोर जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया गया था। विवाह के कुछ सप्ताह बाद कई नवविवाहित महिलाओं ने शिकायत की कि उन्हें दिए गए मंगलसूत्र काले पड़ गए हैं और उनकी चमक पूरी तरह खत्म हो गई है। इसके बाद कुछ महिलाओं ने स्थानीय सर्राफा व्यापारियों से मंगलसूत्र की जांच कराई।

जांच में दावा किया गया कि मंगलसूत्र चांदी के नहीं थे, बल्कि तांबा, जस्ता और निकेल से बनी ‘गिलेट’ मिश्रधातु से तैयार किए गए थे। शिकायत के बाद महिलाओं ने महिला एवं बाल विकास विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें चांदी का मंगलसूत्र देने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन कम गुणवत्ता वाले आभूषण वितरित किए गए।

मामले के तूल पकड़ने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया कि वर्तमान योजना के तहत चांदी का मंगलसूत्र देना अनिवार्य नहीं है। विभाग के अनुसार, मार्च 2024 में जारी संशोधित दिशा-निर्देशों के मुताबिक प्रत्येक हितग्राही पर 50 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं। इसमें 35 हजार रुपये सीधे दुल्हन के बैंक खाते में हस्तांतरित किए जाते हैं, 8 हजार रुपये विवाह आयोजन पर खर्च होते हैं और 7 हजार रुपये कपड़े, प्रसाधन सामग्री, जूते, मंगलसूत्र तथा अन्य उपहार सामग्री के लिए निर्धारित हैं। विभाग ने यह भी कहा कि चांदी का मंगलसूत्र देने की अनिवार्यता वर्ष 2013 में ही समाप्त कर दी गई थी।

विभाग ने यह भी बताया कि आंतरिक जांच में कुछ उपहार सामग्री निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाई गई। इसके बाद संबंधित आपूर्तिकर्ता के भुगतान में प्रति जोड़ा एक हजार रुपये की कटौती की गई और कुल 3.60 लाख रुपये की राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में वापस जमा करा दी गई।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि उन्हें इस मामले की शिकायत मिली है और आभूषणों की खरीद, गुणवत्ता परीक्षण तथा वितरण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।