छत्तीसगढ़ में अंतरधार्मिक निकाह पर सख्ती, गैर-मुस्लिम से शादी से पहले वक्फ बोर्ड की अनुमति होगी जरूरी
By : hashtagu, Last Updated : July 6, 2026 | 3:39 pm
रायपुर: छत्तीसगढ़ में अंतरधार्मिक निकाह (Interfaith Nikah) की प्रक्रिया को लेकर नए नियम लागू किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड (Chhattisgarh Waqf Board) ने निकाह (Nikah) व्यवस्था में पारदर्शिता (Transparency) लाने और कथित लव जिहाद (Love Jihad) तथा फर्जी निकाह के मामलों पर रोक लगाने के उद्देश्य से नई व्यवस्था तैयार की है। प्रस्तावित नियम अगस्त 2026 से पूरे प्रदेश में लागू किए जाएंगे।
वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों के अनुसार, यदि कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम युवक या युवती से निकाह करना चाहता है, तो पहले वक्फ बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति, आवश्यक दस्तावेज और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने और बोर्ड की अनुमति मिलने के बाद ही निकाह कराया जा सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत बिना अनुमति अंतरधार्मिक निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही प्रदेश में निकाह कराने वाले सभी मौलानाओं का पंजीयन अनिवार्य किया जाएगा। केवल वक्फ बोर्ड में पंजीकृत मौलाना ही निकाह संपन्न करा सकेंगे।
वक्फ बोर्ड का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि निकाह प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाना है। बोर्ड के अनुसार, अंतरधार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों को संबंधित कानूनों का पालन करना होगा और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
नई व्यवस्था के तहत अंतरधार्मिक निकाह के मामलों में दोनों पक्षों की पहचान, आवश्यक होने पर धर्म परिवर्तन से जुड़े दस्तावेज, कानूनी औपचारिकताओं और अन्य जरूरी अभिलेखों की जांच की जाएगी। सभी दस्तावेजों के सत्यापन और अनुमति के बाद ही निकाह की प्रक्रिया पूरी होगी। बोर्ड का कहना है कि इससे कथित लव जिहाद, फर्जी निकाह और दस्तावेजों में गड़बड़ी जैसे मामलों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी।
छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज के अनुसार, वर्तमान में कई स्थानों पर बिना किसी केंद्रीय रिकॉर्ड के निकाह कराए जाते हैं। इसके कारण भविष्य में वैवाहिक स्थिति, पहचान और सरकारी दस्तावेजों से जुड़े विवाद सामने आते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक निकाह का पूरा रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के पास सुरक्षित रखा जाएगा।
प्रस्ताव के अनुसार, निकाह के बाद जारी होने वाला प्रमाणपत्र भी वक्फ बोर्ड के माध्यम से जारी किया जाएगा। अभी अलग-अलग प्रारूप में तैयार होने वाले निकाहनामों की जगह एक समान प्रारूप लागू किया जाएगा। इससे फर्जी दस्तावेज तैयार करने और गलत जानकारी देने जैसी शिकायतों पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों से महिलाओं को बहला-फुसलाकर विवाह करने तथा संपत्ति विवाद से जुड़े कुछ मामलों की शिकायतें मिली हैं। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए आदिवासी इलाकों में विशेष निगरानी रखी जाएगी और सभी निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में जांच आसानी से की जा सके।




