वाह! कांगेर घाटी के भाई-बहन की बादशाहत, चिड़ियों की बोली पहचानते

कुदरत हर किसी को कोई न कोई खासियत हर इंसान को देती। बस सही वक्त और माहौल मिलने पर उसके अंदर की क्षमता सामने आ जाती है। इसके बाद तो आपकी प्रतिभा हर किसी को चौंका देती है।

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  • Publish Date - November 27, 2022 / 10:05 AM IST

छत्तीसगढ़। कुदरत हर किसी को कोई न कोई खासियत हर इंसान को देती। बस सही वक्त और माहौल मिलने पर उसके अंदर की क्षमता सामने आ जाती है। इसके बाद तो आपकी प्रतिभा हर किसी को चौंका देती है। कुछ ऐसी ही विलक्षण क्षमता के धनी दो भाई बहन वंशिका और युवराज की है। ये दोनों ही 60 चिड़ियों की बोली से पहचान लेते है, किस प्रजाति की चिड़ियां है। इतना ही नहीं, वे उसकी आवाज को सुनकर तस्वीर भी बना देते हैं। इसके अलावा 40 प्रकार की तितलियों को भी पहचान लेते हैं।
इसके पीछे की मुख्य वजह है की जगदलपुर जिले के कांगेर घाटी की सुरम्य प्राकृतिक वादियों की बीच इनका गांव मांझीपाल बसा है। जहां पेड़ों की डालियों पर चिड़ियों की चहचाहट और सतरंगी तितलियों का यहां की वादियों में इतराना। इसके कारण इनके दिलो दिमाग में इनकी भाषा को समझने की अद्भुत मेधा विकसित हुई। नतीजा अब इन्हें लोग घाटी के बादशहत के नाम की उपाधि भी देते हैं।
आदिवासी परिवार की पृष्ठ भूमि से आने दोनों अच्छी अंग्रेजी भी बोलते हैं। 7 वर्षीय वंशिका क्लास 6 की छात्रा है। युवराज क्लास थर्ड में है।

इन्हीं दोनों ने खोजा था सबसे बड़ी तितली

दोनों भाई ने ही छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी तितली ब्यू मोरमन को कांगेर घाटी में खोजा है।फिलहाल घाटी की पक्षियों को सूचीबद्ध करते हुए कांगेर की दुर्लभ तितली एम फ्लाई पर शोध कर रहे हैं। युवराज खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ कर भारत के लिए खेलना चाहता है। वंशिका आइएएस बनना चाहती है।

इनके शोध पर वन विभाग करेगा मदद

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अंतर्गत कोटमसर रेंज के वन परीक्षेत्र अधिकारी केआर कश्यप ने बताया कि वंशिका और युवराज के संदर्भ में उन्हें जानकारी मिली है। इन दोनों नन्हे पक्षी विशेषज्ञों को विभाग द्वारा हरसंभव मदद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।