सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के गांवों में पादरियों के प्रवेश रोकने वाली होर्डिंग के खिलाफ याचिका खारिज की

मामला उन होर्डिंग्स से जुड़ा है, जो ग्राम सभाओं के नाम पर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में कथित रूप से पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध की बात कही गई थी

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  • Updated On - February 17, 2026 / 12:20 AM IST

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कांकेर जिले के कुछ गांवों में ईसाई पादरियों (Christian pastors) और धर्मांतरित ईसाइयों (converted Christians) के प्रवेश पर रोक लगाने वाले पोस्टरों के खिलाफ दायर याचिका (petition) को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को पहले संबंधित वैधानिक प्राधिकरण के पास जाना चाहिए था और हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने की जरूरत नहीं है।

मामला उन होर्डिंग्स से जुड़ा है, जो ग्राम सभाओं के नाम पर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में कथित रूप से पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध की बात कही गई थी। इसे जबरन धर्मांतरण (forced conversion) रोकने के नाम पर उचित ठहराया गया था।

याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया था कि इस तरह के पोस्टर संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता (religious freedom) के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत रखें। ऐसे में सीधे सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बनती।

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से दलील दी गई कि याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सामने नए तथ्य पेश किए गए हैं, जबकि हाईकोर्ट में सीमित मुद्दों पर बहस हुई थी। अदालत ने इस आधार पर याचिका को खारिज कर दिया।

इस फैसले के बाद मामला अब संबंधित प्रशासनिक प्राधिकरण और स्थानीय स्तर पर आगे बढ़ेगा।