हजारों करोड़ खर्च के बाद भी इंदौर में नल से निकला जहर, दूषित पानी से 20 मौतें, 3200 से ज्यादा बीमार

By : hashtagu, Last Updated : January 10, 2026 | 10:36 am

इंदौर:  देश का सबसे साफ शहर कहलाने वाला इंदौर (Indore) इन दिनों एक गंभीर नागरिक और जनस्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। शहर के भगीरथपुरा और आसपास के इलाकों में दूषित पेयजल पीने से अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,200 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं। कई मरीज आईसीयू में भर्ती हैं और जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। अस्पतालों में लगातार नए मरीज सामने आ रहे हैं, जिससे यह साफ है कि संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल गुरुवार को ही 10 मरीजों को आईसीयू में शिफ्ट किया गया। अब तक कुल 446 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है, जिनमें से 50 मरीजों का इलाज अभी जारी है। दूषित पानी को लेकर लोगों में डर बना हुआ है और पीने के पानी जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर भी शहर में भय और अनिश्चितता का माहौल है।

इस त्रासदी को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि बीते पांच वर्षों में इंदौर की जल आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इंदौर नगर निगम अपने कुल बजट का करीब 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा पानी और स्वच्छता पर खर्च करता है। वर्ष 2021-22 में यह खर्च 1,680 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर प्रस्तावित 2,450 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी अवधि में नगर निगम का कुल बजट 5,135 करोड़ रुपये से बढ़कर 8,200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया।

इसके अलावा एशियन डेवलपमेंट बैंक, अमृत योजना और स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भी जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और 24 घंटे सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए। बावजूद इसके, दूषित पानी शहर की पाइपलाइनों में पहुंचा और हजारों घरों तक सप्लाई हो गया। इस घटना ने प्रशासन, निगरानी तंत्र और व्यवस्था की ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने इस घटना को “जनस्वास्थ्य आपातकाल” बताते हुए प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने मांग की है कि इंदौर के सभी नागरिकों को 24×7 सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही जल स्रोत से लेकर वितरण तक पूरी जल आपूर्ति प्रणाली के समग्र पुनर्गठन की जरूरत बताई गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि केवल तात्कालिक मरम्मत और दिखावटी उपायों से भविष्य में ऐसी घटनाओं को नहीं रोका जा सकता, जब तक कि व्यवस्थागत खामियों को दूर नहीं किया जाता।

यह मामला अब कानूनी मोर्चे पर भी पहुंच गया है। भगीरथपुरा निवासी रामू सिंह ने दूषित पानी से हुई मौतों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग करते हुए याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि लोग पिछले दो वर्षों से दूषित पानी पी रहे थे। इसमें संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने और जांच पूरी होने तक सभी जिम्मेदार अधिकारियों को पद से हटाने की मांग की गई है, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।