टाइगर कॉरिडोर में NH-46 प्रोजेक्ट को हरी झंडी, 20.9 KM बरेठा घाट सेक्शन पर जल्द शुरू होगा काम

By : hashtagu, Last Updated : March 21, 2026 | 4:36 pm

भोपाल, मध्यप्रदेश टाइगर कॉरिडोर (Tiger Corridor) से जुड़े नेशनल हाइवे-46 (NH-46) के संवेदनशील बरेठा घाट सेक्शन पर अब सड़क निर्माण का रास्ता लगभग साफ हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत वाइल्डलाइफ बोर्ड (Wildlife Board) और केंद्र सरकार (Central Government) से सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं। अदालत से स्टे हटने का औपचारिक आदेश मिलते ही करीब 20.9 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

NH-46 को मध्यप्रदेश का सबसे लंबा और अहम उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर माना जाता है, जो ग्वालियर से बैतूल तक करीब 634 किलोमीटर तक फैला है। यह हाईवे भोपाल-नागपुर कॉरिडोर की एक महत्वपूर्ण कड़ी है और इससे राजधानी क्षेत्र से दक्षिणी मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सीमा तक सीधा संपर्क मिलता है।

बैतूल तक हाईवे का अधिकांश हिस्सा पहले ही बन चुका है, लेकिन केसला रेंज, भौंरा रेंज और बरेठा घाट के तीन हिस्सों में करीब 20.91 किलोमीटर का काम लंबे समय से अटका हुआ था। यह इलाका टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर और घने जंगलों में आता है, जिसके चलते 1 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट ने यहां निर्माण पर रोक लगा दी थी।

बरेठा घाट सेक्शन पर्यावरण और सड़क सुरक्षा दोनों दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। मौजूदा समय में यह दो लेन की सड़क है, जहां तीखे मोड़, ढलान और कम विजिबिलिटी के कारण हादसों का खतरा बना रहता है। भारी ट्रैफिक और वन्यजीवों की आवाजाही के चलते यहां जाम और दुर्घटनाएं आम हो गई हैं।

पुलिस आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच इस क्षेत्र में 51 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और करीब 62 लोग घायल हुए। कई हादसों में अचानक सड़क पर वन्यजीवों का आना भी बड़ा कारण रहा।

अब इस पूरे सेक्शन को चार लेन में विकसित किया जाएगा। सड़क को चौड़ा करने के साथ घुमावदार हिस्सों को ठीक किया जाएगा ताकि सफर ज्यादा सुरक्षित और आसान हो सके। परियोजना में दो बड़े ब्लैक स्पॉट्स को खत्म करने की योजना भी शामिल है।

इसके तहत 3 माइनर ब्रिज बनाए जाएंगे और 38 बॉक्स कलवर्ट्स का पुनर्निर्माण व चौड़ीकरण किया जाएगा। साथ ही 1 रेलवे अंडरब्रिज, 2 रोड ओवरब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास का निर्माण किया जाएगा, जिससे ट्रैफिक बिना रुकावट के चल सके।

इस परियोजना की खास बात यह है कि सड़क विकास के साथ वन्यजीव संरक्षण का भी पूरा ध्यान रखा गया है। बरेठा घाट क्षेत्र में 10 एनिमल अंडरपास और 1 एनिमल ओवरपास बनाए जाएंगे, ताकि जानवरों की प्राकृतिक आवाजाही प्रभावित न हो। इन संरचनाओं के डिजाइन और स्थान तय करने में वाइल्डलाइफ बोर्ड और हाईकोर्ट के निर्देशों को शामिल किया गया है।