राणा सांगा पर आपत्तिजनक टिप्पणी गलत : दिग्विजय सिंह

पिछले दिनों सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा को लेकर टिप्पणी की थी, उसके बाद कुछ लोगों ने उनके आवास पर भी हमला किया था। उसी पर सिंह ने अपनी राय जाहिर की।

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  • Publish Date - March 29, 2025 / 05:43 PM IST

ग्वालियर 29 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने राणा सांगा पर की गई टिप्पणी का विरोध करते हुए कहा कि उन पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी गलत है, टिप्पणी करने वाले व्यक्ति पर हमला करने का किसी को अधिकार नहीं है।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में राष्ट्रीय मजदूर इंटक के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि राणा सांगा जैसे वीर हमारे इतिहास में कम हुए हैं, जिसके अंग-अंग पर चोट थी, सौ से ज्यादा घाव थे। उन पर अगर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाती है, तो गलत है और अगर किसी ने टिप्पणी की है तो उसके घर पर हमला करने का किसी को अधिकार नहीं है।

पिछले दिनों सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा को लेकर टिप्पणी की थी, उसके बाद कुछ लोगों ने उनके आवास पर भी हमला किया था। उसी पर सिंह ने अपनी राय जाहिर की।

दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि देश और प्रदेश में मजदूरों के हितों का संरक्षण नहीं हो रहा है। गांव के मनरेगा के मजदूरों का भुगतान नहीं हो रहा है, उन्हें काम नहीं मिल रहा है, पलायन हो रहा है और कोई सुनने वाला नहीं है। मजदूरों के जो कानून थे, वह इन्होंने बदल दिए गए हैं और राष्ट्रीय मजदूर की जो नीति होनी चाहिए थी, वह जिनेवा इंटरनेशनल कन्वेंशन के अनुरूप होना चाहिए। उसका पालन नहीं हो रहा है, 2015 के बाद से समिति की कोई भी बैठक नहीं हुई।

भाजपा की ओर से परिवारवाद के आरोपों पर दिग्विजय सिंह ने कहा, लोकतंत्र में जनता जिसको भेजती है, उसका वह अधिकार होता है। भाजपा के अनेक उदाहरण मेरे पास हैं, इसलिए लोकतंत्र में वही चुनकर जाता है, जिसको जनता चाहती है। परिवारवाद तो सामंती प्रवृत्ति का सूचक है, इसलिए आज के लोकतंत्र में कहीं कोई सामंत नहीं है। सामंत वह है, जिसके पास लोकतंत्र में वोट का हक है, यानी आज के दौर में देश का हर नागरिक सामंत है।

वक्फ बोर्ड विधेयक में संशोधन के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जो संशोधन बिल लाया जा रहा है, हम उसके खिलाफ हैं, क्योंकि यह बुनियादी तौर पर भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों को जो अधिकार है, उन्हें छीनने का प्रयास है। इस देश में पिछले 10-11 साल से यह पूरी सरकार केवल हिंदू-मुसलमान के अलावा दूसरा कोई काम नहीं कर रही है।

राज्य में बेरोजगार युवाओं को आकांक्षी युवा का नाम दिए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, युवाओं को रोजगार नहीं देना, उन्हें नए-नए नाम दिए जा रहे हैं। हालात यह है कि न युवाओं को रोजगार मिल रहा है, जितना इम्तिहान हो जाता है, उसका नतीजा नहीं आता, नर्सिंग घोटाला सामने आया, मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।