CAPF बिल पर सियासत तेज, अर्धसैनिक बलों में IPS दबदबा जारी रहेगा?
By : hashtagu, Last Updated : March 23, 2026 | 1:16 pm
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) (Central Armed Police Forces) (सामान्य प्रशासन) विधेयक (Bill) पेश करेंगे, जिसमें बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ जैसे अर्धसैनिक बलों में आईजी (IG) और उससे ऊपर के पदों पर आईपीएस (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (Deputation) को लेकर नए नियम तय किए गए हैं।
इस विधेयक में सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन बलों के शीर्ष पद यानी डीजी (DG) पर आईपीएस अधिकारी ही नियुक्त किए जाएंगे। इसके अलावा एडीजी (ADG) स्तर पर कम से कम 67 प्रतिशत और आईजी स्तर पर 50 प्रतिशत पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित रहेंगे। हालांकि मौजूदा व्यवस्था में भी यही अनुपात लागू है, लेकिन अब इसे कानून के रूप में स्थापित करने की तैयारी है।
पिछले साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने आईजी स्तर के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की डेप्युटेशन के जरिए नियुक्ति को लेकर टिप्पणी की थी और कहा था कि दो साल के भीतर इस व्यवस्था को कम किया जाए, ताकि अर्धसैनिक बलों के अपने कैडर अधिकारियों को अधिक अवसर मिल सके। इसके बावजूद सरकार ने इस बिल में आईजी स्तर पर 50 प्रतिशत का अनुपात बनाए रखने का प्रावधान रखा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस विषय में केंद्र सरकार को नए नियम बनाने का अधिकार रहेगा, चाहे पहले कोई अदालत का आदेश या अन्य निर्देश क्यों न दिए गए हों।
दरअसल यह पूरा मामला CAPF बनाम IPS के विवाद से जुड़ा हुआ है। CAPF में दो तरह के अधिकारी होते हैं। एक वे जो इंडियन पुलिस सर्विस यानी IPS से आते हैं और डेप्युटेशन पर कुछ समय के लिए इन बलों में नियुक्त होते हैं। दूसरे वे अधिकारी होते हैं जो CAPF के अपने कैडर से होते हैं और सीधे भर्ती होकर आते हैं। इन कैडर अधिकारियों की भर्ती UPSC द्वारा आयोजित CAPF (AC) परीक्षा के जरिए होती है।
विवाद की सबसे बड़ी वजह प्रमोशन से जुड़ी असमानता है। एक IPS अधिकारी आमतौर पर 13 से 14 साल में DIG रैंक तक पहुंच जाता है, जबकि CAPF के कैडर अधिकारी को इसी पद तक पहुंचने में 25 से 30 साल लग जाते हैं। आंकड़े बताते हैं कि CRPF और BSF जैसे बलों में 60 प्रतिशत से अधिक कैडर अधिकारी असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर भर्ती होने के बाद 10 से 12 साल तक उसी रैंक पर बने रहते हैं, जबकि इसी दौरान IPS अधिकारियों को दो प्रमोशन मिल चुके होते हैं।
लंबे समय तक प्रमोशन नहीं मिलने से CAPF के कैडर अधिकारियों में असंतोष बढ़ा है। पिछले पांच साल में वॉलेंटियरी रिटायरमेंट यानी VRS लेने वाले अधिकारियों की संख्या में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं पिछले तीन साल में CAPF के 20 हजार से ज्यादा जवानों और अधिकारियों ने VRS लिया या इस्तीफा दिया है।
ऐसे में यह विधेयक सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि CAPF और IPS के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को और तेज करने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस पर संसद और सुरक्षा व्यवस्था दोनों स्तरों पर बहस और तेज होने की संभावना है।



