भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सरकार देगी स्वतः संज्ञान बयान, टैरिफ घटने से निर्यात को बड़ी राहत
By : hashtagu, Last Updated : February 3, 2026 | 2:05 pm
नई दिल्ली: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (trade deal) पर केंद्र सरकार संसद में स्वतः संज्ञान (suo moto) बयान जारी करेगी। अगस्त 2025 में अमेरिका (United States) ने रूस से कच्चा तेल (crude oil) और सैन्य उपकरण (military equipment) खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ (tariff) और अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क (punitive duty) लगाया था। ये शुल्क पहले से लागू अमेरिकी टैरिफ के ऊपर लगाए गए थे, जिससे भारतीय उत्पादों का निर्यात (exports) बुरी तरह प्रभावित हुआ।
अब अमेरिका ने इस कुल शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा है कि उन्हें प्रसन्नता है कि “मेड इन इंडिया (Made in India) उत्पादों पर अब 18 प्रतिशत का कम टैरिफ लगेगा।” सरकार का मानना है कि इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी।
इस फैसले से भारत के श्रम-प्रधान (labour-intensive) क्षेत्रों को सीधा फायदा होने की उम्मीद है। कपड़ा (garments), चमड़ा और गैर-चमड़ा जूते, रत्न और आभूषण (gems and jewellery), कालीन और हस्तशिल्प (handicrafts) जैसे सेक्टरों को बढ़ावा मिल सकता है, क्योंकि ऊंचे टैरिफ के कारण इन वस्तुओं का अमेरिका को निर्यात लगातार प्रभावित हो रहा था।
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार (bilateral trade) की बात करें तो 2021-25 के दौरान अमेरिका भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार भागीदार रहा। अमेरिका भारत के कुल निर्यात में लगभग 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और कुल द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 186 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें 86.5 अरब डॉलर का निर्यात और 45.3 अरब डॉलर का आयात शामिल था। इसी अवधि में भारत को अमेरिका के साथ 41 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष (trade surplus) रहा। यह अधिशेष 2023-24 में 35.32 अरब डॉलर और 2022-23 में 27.7 अरब डॉलर था। सेवाओं (services) के क्षेत्र में भारत ने अमेरिका को लगभग 28.7 अरब डॉलर का निर्यात और 25.5 अरब डॉलर का आयात किया, जिससे 3.2 अरब डॉलर का अधिशेष बना। कुल मिलाकर भारत ने अमेरिका के साथ करीब 44.4 अरब डॉलर का कुल व्यापार अधिशेष दर्ज किया।
वर्ष 2024 में भारत से अमेरिका को प्रमुख निर्यात वस्तुओं में दवाइयां और जैविक उत्पाद 8.1 अरब डॉलर, दूरसंचार उपकरण 6.5 अरब डॉलर, कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर 5.3 अरब डॉलर, पेट्रोलियम उत्पाद 4.1 अरब डॉलर, वाहन और ऑटो पुर्जे 2.8 अरब डॉलर, सोने और अन्य कीमती धातुओं के आभूषण 3.2 अरब डॉलर, सूती रेडीमेड कपड़े 2.8 अरब डॉलर और लोहा-इस्पात उत्पाद 2.7 अरब डॉलर शामिल रहे। वहीं अमेरिका से भारत के आयात में कच्चा तेल 4.5 अरब डॉलर, पेट्रोलियम उत्पाद 3.6 अरब डॉलर, कोयला और कोक 3.4 अरब डॉलर, कट और पॉलिश किए हीरे 2.6 अरब डॉलर, इलेक्ट्रिक मशीनरी 1.4 अरब डॉलर, विमान और उनके पुर्जे 1.3 अरब डॉलर तथा सोना 1.3 अरब डॉलर रहा।
सेवा व्यापार में अनुमान के मुताबिक वर्ष 2024 में अमेरिका ने भारत से 40.6 अरब डॉलर की सेवाएं आयात कीं, जिसमें कंप्यूटर और सूचना सेवाएं 16.7 अरब डॉलर और बिजनेस मैनेजमेंट व कंसल्टिंग सेवाएं 7.5 अरब डॉलर की रहीं।
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अब भी कई उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ लगाता है। डेयरी उत्पादों पर 188 प्रतिशत, फल और सब्जियों पर 132 प्रतिशत, कॉफी-चाय-कोको और मसालों पर 53 प्रतिशत, अनाज और खाद्य तैयारियों पर 193 प्रतिशत, तिलहन और खाद्य तेलों पर 164 प्रतिशत, पेय और तंबाकू पर 150 प्रतिशत, खनिज और धातुओं पर 187 प्रतिशत तथा रसायनों पर 56 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जाता है। ऐसे में 18 प्रतिशत टैरिफ की नई व्यवस्था को भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।



