10 साल से अपने लिए कपड़े नहीं खरीदे: विमेंस डे पर महिला पत्रकारों से बोले छत्तीसगढ़ के CM विष्णुदेव साय, पिता के निधन के बाद मां ने संभाला परिवार

मुख्यमंत्री साय ने बातचीत में अपने बचपन के संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वे लगभग 10 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था।

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  • Updated On - March 8, 2026 / 03:53 PM IST

रायपुर (छत्तीसगढ़): अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) के मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महिला पत्रकारों से विशेष बातचीत (interaction) की। इस दौरान उन्होंने अपने निजी जीवन, संघर्ष और परिवार से जुड़ी कई बातें साझा कीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले कई वर्षों से राजनीतिक और प्रशासनिक व्यस्तता इतनी अधिक है कि उन्होंने करीब 10 साल से अपने लिए खुद कपड़े (clothes) तक नहीं खरीदे हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए कपड़े खरीदने की जिम्मेदारी उनकी पत्नी निभाती हैं और घर-परिवार की कई सामाजिक जिम्मेदारियां भी वही संभालती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने बातचीत में अपने बचपन के संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वे लगभग 10 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार में चार भाई थे और वे सबसे बड़े थे। पिता के जाने के बाद उनकी मां ने ही परिवार को संभाला और मां तथा पिता दोनों की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने कठिन परिस्थितियों में बच्चों को संस्कार और संघर्ष के साथ आगे बढ़ना सिखाया और उसी का परिणाम है कि वे आज इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं।

महिला पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पहले महिलाओं की सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक कार्यक्रमों में भागीदारी बहुत कम होती थी, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups), जनधन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और राज्य की महतारी वंदन योजना जैसी पहल से महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है और इसी दिशा में छत्तीसगढ़ में भी विकसित राज्य का विजन तैयार किया जा रहा है। इसके लिए सरकार कई महत्वपूर्ण मिशनों पर काम कर रही है, जिनमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने महिला पत्रकारों के काम की सराहना करते हुए कहा कि पत्रकारिता में महिलाओं की भूमिका समाज में जागरूकता बढ़ाने और लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है।