छत्तीसगढ़ हमेशा घर जैसा लगता है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर पंडुम में संस्कृति और नक्सलमुक्ति पर दिया संदेश
By : hashtagu, Last Updated : February 7, 2026 | 12:55 pm
जगदलपुर, छत्तीसगढ़। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने कहा कि छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) आना उन्हें हमेशा घर जैसा महसूस कराता है। यहां की संस्कृति (Culture) प्राचीन है और सबसे मीठी है। बस्तर पंडुम (Bastar Pandum Festival) को लोग केवल कार्यक्रम नहीं बल्कि उत्सव (Festival) की तरह जीते हैं। बस्तर की सुंदरता और संस्कृति पर्यटकों (Tourists) को आकर्षित करती है। राष्ट्रपति ये बातें जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान (Lalbagh Ground) में आयोजित बस्तर पंडुम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं।
बस्तर पंडुम 2026 शुभारम्भ समारोह https://t.co/XKZIKNIA3R
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) February 7, 2026
राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ वीरों की धरती है, जहां के लोगों ने देश की रक्षा में अपना बलिदान दिया है। बस्तर की सुंदरता देखकर ऐसा लगता है मानो मां दंतेश्वरी ने इस धरती को अपने हाथों से सजाया हो। इस क्षेत्र में प्राकृतिक संपदा की भरपूर संभावनाएं हैं, जो इसे विशेष बनाती हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले चार दशकों से नक्सलवाद के कारण बस्तर के आदिवासियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा, लेकिन अब बस्तर नक्सलमुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि भटकाने वालों की बातों में न आएं।
राष्ट्रपति ने गांव-गांव तक स्कूल, सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने पद्मश्री से सम्मानित चिकित्सक दंपती डॉ. बुधरी ताती सहित सभी सम्मानित लोगों को बधाई दी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति को ढोकरा कला से बना कर्मा वृक्ष और कोसा शिल्प से तैयार गमछा भेंट किया। बस्तर पंडुम के तहत विभिन्न जनजातियों द्वारा पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, वाद्ययंत्र, वेशभूषा और रीति-रिवाजों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि बस्तर पंडुम 2026 के शुभारंभ अवसर पर यहां उपस्थित होना उनके लिए गर्व की बात है। बस्तर के पारंपरिक व्यंजन, कला और संस्कृति मिलकर इसे विश्व स्तर पर पहचान दिला रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की ढोकरा शिल्प कला देश-विदेश में पसंद की जा रही है और यही बस्तर की पहचान है। यहां का जनजातीय समाज प्रकृति के साथ संतुलन का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मां दंतेश्वरी की पावन भूमि पर राष्ट्रपति का आगमन पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण है। राष्ट्रपति का जनजातीय समाज और बस्तर की माताओं-बहनों के प्रति विशेष अपनत्व रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को समर्पित मंच है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक लोगों ने पंजीयन कराया है। जहां पिछली बार 7 विधाएं थीं, वहीं इस बार 12 विधाओं को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले बस्तर को नक्सल भय से जोड़ा जाता था, लेकिन अब हिंसा की जगह विकास ने ले ली है। सरकार ने 31 मार्च 2026 तक पूरे बस्तर से नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य रखा है और कई ऐसे गांव हैं जहां पहली बार तिरंगा फहराया गया है।




