रायपुर सेंट्रल जेल में 170 दिन की प्रताड़ना का दावा: चैतन्य बघेल बोले– गंदा पानी, बिना इलाज कैदी लगाते थे इंजेक्शन
By : hashtagu, Last Updated : February 12, 2026 | 1:19 pm
By : hashtagu, Last Updated : February 12, 2026 | 1:19 pm
रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) के बेटे चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले (liquor scam case) में 170 दिन जेल में रहने के बाद रायपुर सेंट्रल जेल (Raipur Central Jail) की स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 3 जनवरी 2026 को जेल से बाहर आने के बाद सीनियर एडवोकेट (Senior Advocate) और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट (Podcast) में बातचीत करते हुए चैतन्य ने दावा किया कि उन्हें 10×7 के आइसोलेटेड सेल (isolated cell) में 170 दिनों तक रखा गया, जहां पीने के पानी में कीड़े मिलते थे, इलाज की कोई व्यवस्था नहीं थी और कैदियों को खुद इंजेक्शन (injection), कैनुला (cannula) और ड्रेसिंग (dressing) करनी पड़ती थी।
चैतन्य बघेल ने बताया कि कोर्ट की सजा एक होती है, लेकिन जेल के अंदर की परिस्थितियां दूसरी सजा जैसी होती हैं। उन्होंने कहा कि जिस सेल में उन्हें रखा गया, उसमें टॉयलेट और खाने की कोई अलग व्यवस्था नहीं थी। एक ही कमरे में शौचालय था और वहीं खाना भी खाना पड़ता था क्योंकि कोई पार्टिशन नहीं था। वे जमीन पर सोते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि साफ पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं था और कई बार पानी में कीड़े मिलते थे।
उन्होंने कहा कि जेल में बीमार कैदियों के इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं थी। सामान्य इलाज जैसे इंजेक्शन लगाना, कैनुला चढ़ाना और घाव की ड्रेसिंग प्रोफेशनल स्टाफ की बजाय कैदी ही कर लेते थे। सफाई का भी ध्यान नहीं रखा जाता था। उन्होंने बताया कि उनकी तबीयत भी खराब हुई, लेकिन जेल प्रबंधन ने अस्पताल भेजने की जरूरत नहीं समझी। परिवार की ओर से कोर्ट में निवेदन किया गया, इसके बावजूद प्रशासन का जवाब था कि हालत ठीक है और अस्पताल भेजने की जरूरत नहीं है।
चैतन्य ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक कवासी लखमा ने लगातार सीने में दर्द की शिकायत की, लेकिन उन्हें इलाज के लिए नहीं भेजा गया। बाद में जब भूपेश बघेल ने डीजीपी को पत्र लिखा, तब जाकर कवासी लखमा को जिला अस्पताल ले जाया गया।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं के साथ भेदभाव का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि जेल में कांग्रेस से जुड़े कैदियों के साथ ज्यादा बुरा व्यवहार किया जाता है। उन्होंने कांग्रेस नेता जीवन लाल ठाकुर, जो चारामा के निवासी थे, का जिक्र करते हुए कहा कि जेल अस्पताल में सही इलाज नहीं मिला और उनकी मौत हो गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि कोई कैदी एक्सपायर हो जाता था तो उसे ऑक्सीजन मास्क लगाकर अस्पताल भेज दिया जाता था।
जेल निरीक्षण को लेकर पूछे गए सवाल पर चैतन्य ने कहा कि जज को वही दिखाया जाता है जो वे देखना चाहते हैं। उनका कहना था कि जब साफ पानी तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा तो यह मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने दावा किया कि कुछ वार्डों में पानी की कमी इतनी थी कि कैदी नाली का पानी रोककर टॉयलेट के लिए इस्तेमाल करते थे।
इसी पॉडकास्ट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। जब उन्होंने कोई कमिटमेंट नहीं दिया तो उनके यहां लगातार छापे पड़ने लगे। भूपेश बघेल ने कहा कि एक-दो बार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें मिलने बुलाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बातचीत के लिए आमंत्रित किया। शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि बुलाने का मकसद क्या है, लेकिन बाद में जब हर मुलाकात के कुछ दिनों बाद छापा पड़ता था तो उन्हें संदेह हुआ।
उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान उनसे पूछा जाता था कि उनके खिलाफ कौन-कौन से केस चल रहे हैं, कौन से अधिकारी भरोसेमंद हैं और किस तरह मदद की जा सकती है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि वे विपक्ष में हैं और विपक्ष का धर्म सरकार की आलोचना करना होता है, जिसे वे निभाते रहेंगे। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर कहा कि आपने मदद की बात कही थी, लेकिन यहां तो छापा पड़ गया। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वे अधिकारियों से बात करेंगे।
इन आरोपों पर अभी तक जेल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।