अफीम की खेती को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में भारी हंगामा, 29 विपक्षी विधायक सस्पेंड
By : hashtagu, Last Updated : March 9, 2026 | 2:04 pm
रायपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ विधानसभा (Chhattisgarh Assembly) में दुर्ग जिले के समोदा गांव में अफीम की खेती के मामले को लेकर सोमवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) लाकर तत्काल चर्चा की मांग की, लेकिन सदन में इसे स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए आसंदी (Speaker’s Chair) तक पहुंच गए और गर्भगृह (Well of the House) में उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति बिगड़ने पर विधानसभा अध्यक्ष ने 29 विपक्षी विधायकों को निलंबित (Suspended) कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ को अफीम का कटोरा बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दुर्ग जिले के समोदा में विनायक ताम्रकर द्वारा अफीम की खेती की जा रही है और सरकार उसे बचाने के लिए षड्यंत्र कर रही है। महंत ने कहा कि इससे प्रदेश में सूखे नशे का कारोबार तेजी से बढ़ सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में दर्ज की गई एफआईआर कमजोर तरीके से बनाई गई है और मुख्य आरोपी को बचाने की कोशिश की गई। बघेल ने कहा कि यह घटना होली से ठीक पहले हुई और मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।
कांग्रेस विधायकों ने कहा कि यह पहली बार रिकॉर्ड में आया इतना गंभीर मामला है और पूरे प्रदेश के फार्महाउस की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि कहीं और भी इस तरह की अवैध खेती तो नहीं हो रही है।
इस पर उप मुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी, जिसके बाद कार्रवाई की गई। पुलिस ने मौके से अफीम जब्त की और आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में आर्थिक पहलुओं की भी जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
सदन में प्रश्नकाल के दौरान भी कई मुद्दों पर तीखी बहस हुई। कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने सवाल उठाया कि बस्तर क्षेत्र में 44 हजार से ज्यादा किसानों से धान की खरीदी नहीं हुई। उन्होंने पूछा कि इनमें कितने वन अधिकार पट्टाधारी किसान हैं और कितने ऋणी और अऋणी किसान हैं। इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने जवाब दिया कि ये किसान धान खरीदी केंद्रों में धान बेचने आए ही नहीं। उन्होंने कहा कि पंजीयन कराने वाले सभी किसान अपना शत-प्रतिशत धान नहीं बेचते और जो किसान केंद्रों में पहुंचे, उनका धान खरीदा गया।
लखेश्वर बघेल ने इस जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जो किसान कर्ज में है, वह धान बेचने क्यों नहीं जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार की लचर व्यवस्था है और धान खरीदी में बड़ा घोटाला हुआ है। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार से पूछा कि कितने किसानों ने धान जमा किया और कितनों ने नहीं किया, साथ ही यह भी बताया जाए कि कितने किसानों से जबरन समर्पण कराया गया।
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने जवाब में कहा कि 44,612 किसान धान खरीदी केंद्रों में नहीं आए और प्रश्न में जबरिया समर्पण कराने वाले किसानों की संख्या नहीं पूछी गई थी।
इसी दौरान भाजपा विधायक प्रमोद मिंज ने दिव्यांगजनों को पदोन्नति में आरक्षण के प्रावधान को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में अब तक क्या कार्रवाई की है। इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि दिव्यांगजनों के लिए पदोन्नति में तीन प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की पदोन्नति नहीं हुई है।
प्रमोद मिंज ने कहा कि केंद्र सरकार का नियम चार प्रतिशत आरक्षण का है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी दिशा में निर्देश दिए हैं। उन्होंने पूछा कि विभाग यह क्यों कह रहा है कि आवेदन नहीं आए और पदोन्नति कब तक होगी इसकी समयसीमा बताई जाए। इस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस मामले में राज्यों को अधिकार दिए हैं और छत्तीसगढ़ सरकार ने तीन प्रतिशत आरक्षण तय किया है। उन्होंने बताया कि अब तक पदोन्नति के लिए कोई आवेदन नहीं मिला, केवल एक आवेदन आया था जिसे बाद में वापस ले लिया गया।
इस पर भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि क्या कोई अधिकारी पदोन्नति नहीं लेना चाहता। उन्होंने कहा कि सरकार का यह जवाब स्वीकार्य नहीं है और ऐसा लगता है कि शासन में अभी भी होली के नशे का असर दिखाई दे रहा है।
इससे पहले प्रश्नकाल के दौरान धान खरीदी के मुद्दे पर भी सदन में जोरदार बहस हुई थी। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने वॉकआउट कर दिया था। भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार किसानों से धान खरीदी का सही आंकड़ा सामने रखे क्योंकि किसानों के साथ धोखाधड़ी हुई है।
बस्तर के किसानों से धान खरीदी नहीं होने का मुद्दा कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने उठाया था और सरकार से जवाब मांगा था। इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि 44,612 किसान धान खरीदी केंद्रों में धान बेचने ही नहीं आए। विपक्ष ने इस जवाब पर कड़ी आपत्ति जताई और धान खरीदी में गड़बड़ी और जबरिया समर्पण कराने का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार से समर्पण कराने वाले किसानों की संख्या स्पष्ट करने की मांग की। इस मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।



