12 साल से कोमा में युवक को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत, निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति

By : hashtagu, Last Updated : March 11, 2026 | 3:55 pm

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 12 साल से कोमा (Coma) में पड़े एक युवक को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी है। अदालत ने कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली (Life Support System) हटाने की मंजूरी देते हुए कहा कि मरीज को गरिमा के साथ मृत्यु (Right to Die with Dignity) का अधिकार है।

यह मामला गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा से जुड़ा है, जो वर्ष 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के बाद गंभीर दिमागी चोट का शिकार हो गए थे। इसके बाद से वह लगातार कोमा की स्थिति में हैं और पिछले 12 साल से ज्यादा समय से उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने एम्स दिल्ली को निर्देश दिया है कि मरीज को पेलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती कर आवश्यक प्रक्रिया के तहत जीवन रक्षक उपचार को धीरे-धीरे हटाया जाए। अदालत ने कहा कि यह प्रक्रिया एक तय योजना के साथ की जाए ताकि मरीज की गरिमा बनी रहे।

मामले की सुनवाई के दौरान मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में बताया गया कि मरीज की हालत बेहद गंभीर है और उसके ठीक होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर है। इसी आधार पर परिवार ने अदालत से जीवन रक्षक उपचार हटाने की अनुमति मांगी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में गरिमा के साथ मृत्यु का अधिकार भी शामिल है। कोर्ट ने 2018 के अपने ऐतिहासिक फैसले और 2023 में संशोधित दिशा-निर्देशों के आधार पर इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी है।