छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकारी स्कूलों में छात्रों को धार्मिक मंत्र पढ़ने के लिए नहीं किया जा सकता बाध्य

By : hashtagu, Last Updated : July 2, 2026 | 6:38 pm

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (High Court) ने सरकारी स्कूलों (Government Schools) में छात्रों से धार्मिक मंत्र (Religious Mantra) का अनिवार्य पाठ (Mandatory Recitation) कराने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी छात्र को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी विशेष धर्म से जुड़े मंत्र या प्रार्थना का पाठ करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह संविधान (Constitution) द्वारा प्रदत्त अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत है।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में सभी धर्मों के विद्यार्थियों के अधिकार समान रूप से सुरक्षित हैं। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़ी प्रार्थना या मंत्र का अनिवार्य पाठ कराना संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुरूप नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि कोई छात्र स्वेच्छा से किसी गतिविधि में शामिल होना चाहता है तो यह अलग बात है, लेकिन उसे इसके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

यह मामला राज्य सरकार द्वारा 12 जून को जारी उस आदेश के बाद सामने आया था, जिसमें सरकारी स्कूलों की दैनिक प्रार्थना सभा और अन्य गतिविधियों में वैदिक मंत्रों और अन्य धार्मिक प्रार्थनाओं के पाठ का प्रावधान किया गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी स्कूलों में किसी भी छात्र पर धार्मिक गतिविधि थोपना उचित नहीं है। अदालत ने संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता और प्रत्येक नागरिक की अंतरात्मा की स्वतंत्रता को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार सुनिश्चित करे।