छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र में नकटी विवाद से कानून व्यवस्था तक सरकार घिरेगी, कांग्रेस ने तैयार की रणनीति
By : hashtagu, Last Updated : July 7, 2026 | 2:43 pm
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा (Chhattisgarh Vidhan Sabha) का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होगा। सत्र को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। अब तक विधायकों की ओर से 1,033 प्रश्न लगाए जा चुके हैं। कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था (Law and Order), किसानों की समस्याएं (Farmers’ Issues), नकटी भूमि विवाद (Nakti Land Dispute), बिजली-पानी संकट (Power and Water Crisis), सड़क निर्माण (Road Infrastructure) और मानसून के दौरान व्यवस्थाओं (Monsoon Preparedness) को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है।
विधानसभा के प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इन मुद्दों पर तीखी बहस होने के आसार हैं। विपक्ष सरकार से विभिन्न विभागों के कामकाज और जनहित से जुड़े मामलों पर जवाब मांगेगा।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में हत्या, चाकूबाजी, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, नशे के कारोबार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करने और प्रभावी कार्रवाई की मांग करेगा।
मानसून सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठेंगे। कांग्रेस खरीफ सीजन के दौरान खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, धान खरीदी की तैयारियों और कृषि क्षेत्र की अन्य समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्ष का आरोप है कि किसानों को समय पर खाद, बीज और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे खेती प्रभावित हो रही है।
रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर चल रहा विवाद भी मानसून सत्र में प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है। कांग्रेस इस मामले में सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाएगी।
नकटी प्रकरण को लेकर भाजपा के एक सांसद द्वारा भी सवाल उठाए जाने के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे को सदन में जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी कर चुका है।
इसके अलावा प्रदेश में मानसून के दौरान सड़कों की स्थिति, जलभराव, पेयजल व्यवस्था, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं तथा विकास कार्यों की प्रगति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। माना जा रहा है कि पांच दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे की स्थिति बन सकती है।




