SPECIAL STORY : जब गंदा पानी नदी में ही मिलना था तो करोड़ों रुपए खर्च क्यों?

नवापारा शहर से प्रतिदिन लाखों लीटर गंदा पानी निकलता है। शहर से निकलने वाला गंदा पानी नालियों से होकर सीधे नदी में मिला दिया जाता है। इस

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  • Updated On - April 1, 2025 / 05:36 PM IST

नवापारा। नवापारा शहर से प्रतिदिन लाखों लीटर गंदा पानी (Dirty water)निकलता है। शहर से निकलने वाला गंदा पानी नालियों से होकर सीधे नदी (River)में मिला दिया जाता है। इस गंदे पानी को नदी में सीधे ना भेज कर ट्रीटमेंट कर नदी में मिलाने के लिए शहर के बाहर जल शुद्धिकरण यंत्र बनाया गया है। लेकिन गंदे पानी को 15 करोड़ 80 लाख की लागत से बने इस सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (जल शुद्धिकरण यंत्र) तक पहुंचाने वाले नालियों के गुणवत्ताहीन कार्य के चलते प्लांट की उपयोगिता धरी की धरी रह गई है।

जानिए क्या है सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट घरों, कंपनियों और उद्योगों सहित विभिन्न स्रोतों से गंदे पानी को एकत्र करते हैं और उपचार संयंत्रों तक पहुंचाते हैं। इस गंदे पानी को उपचार संयंत्र में भेजकर पानी का शुद्धिकरण किया जाता है। यहां पानी को कई स्टेप से गुजारा जाता है ताकि उपचारित अपशिष्ट जल को पर्यावरण के अनुकूल रूप में लाकर जल चक्र में सुरक्षित रूप से वापस लाया जा सके। ट्रीटमेंट के बाद यह पानी वापस नदी में बहा दिया जाता है।

24 इंच के ह्यूम पाइप से कर रहे सप्लाई

गुणवत्ताहीन कार्य से उद्देश्य में गंदा पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने के लिए शहर के प्रारंभिक छोर से अंतिम छोर तक मुख्य नाली का निर्माण किया गया है, जिसमें शहर के भीतर घरों एवं अन्य स्थानों से निकलने वाला गंदा पानी एवं अपशिष्ट पदार्थ मुख्य नाली में जाकर मिलता है और मुख्य नाली के माध्यम से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचता है। लेकिन नाली तक पानी पहुंचाने जो चैंबर बनाया गया है वो भी पूरी तरह से मलबा से अटा पड़ा है साथ ही मुख्य नली तक 24 इंच का ह्यूम पाइप लगाया गया है जिसके चलते हजारों लीटर गंदा पानी प्लांट तक पहुंच ही नहीं पा रहा है। मुख्य नाली भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त और लिकेज होने के कारण गंदा पानी सीधे नदी में मिल रहा है। जिससे नदी का पानी भी दूषित हो रहा है।

करोड़ों खर्च किए गए लेकिन समाधान नहीं

15 करोड़ 80 लाख की लागत से निर्मित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्यादेश 2920/लोनिवि/नपा/2020 -2120 जनवरी 2021 को मेसर्स एड्राइट एसोसिएट्स प्रा लि को जारी किया गया था। गुणवत्ताहीन नाली निर्माण के चलते इसका उद्देश्य अधूरा रह गया है। मुख्य नालियों में कचरा और गाद के चलते पानी ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच ही नहीं पा रहा है। जिससे करोड़ों रुपए खर्च कर भी इसका कोई समाधान होते नहीं दिख रहा है।

संयुक्त संचालक पहुंचे निरीक्षण करने

28 मार्च शुक्रवार को नगरीय प्रशासन के संयुक्त संचालक लोकेश्वर साहू कार्यपालन अभियंता वाय पी आजमानी के साथ निरीक्षण करने एसटीपी पहुंचे। उनके साथ नपा सीएमओ प्रदीप मिश्रा तथा उप अभियंता शिव गर्ग भी थे। हमारे संवाददाता ने गंदा पानी नदी में मिलने की बात कही तो उन्होंने बताया कार्य योजना बन चुकी है जल्द ही उसका निराकरण कर लिया जाएगा।

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