CAF भर्ती विवाद: गृहमंत्री विजय शर्मा पर वादे से मुकरने का आरोप, तीसरी बार HM हाउस पहुंचे अभ्यर्थी, पुलिस बस से तूता भेजे गए

दरअसल, CAF के लिए वर्ष 2018 में 1786 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इस भर्ती में लगभग 417 उम्मीदवार वेटिंग लिस्ट में रखे गए थे, जिन्हें आज तक नौकरी नहीं मिल सकी।

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  • Updated On - January 14, 2026 / 12:01 AM IST

रायपुर। छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स (CAF) भर्ती को लेकर वर्षों से संघर्ष कर रहे वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों ने गृहमंत्री विजय शर्मा (Vijay Sharma) पर वादे से मुकरने का आरोप लगाया है। मंगलवार को CAF के अभ्यर्थी तीसरी बार अपने परिवार और बच्चों के साथ गृहमंत्री निवास पहुंचे, लेकिन इस बार उन्हें न तो मुलाकात मिली और न ही कोई आश्वासन। नाराज अभ्यर्थियों ने गृहमंत्री आवास के बाहर जमकर नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने सभी को बस में भरकर तूता धरना स्थल भेज दिया।

दरअसल, CAF के लिए वर्ष 2018 में 1786 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इस भर्ती में लगभग 417 उम्मीदवार वेटिंग लिस्ट में रखे गए थे, जिन्हें आज तक नौकरी नहीं मिल सकी। हैरानी की बात यह है कि CAF में वर्तमान में 3 हजार से अधिक पद खाली बताए जा रहे हैं। इन 7 वर्षों के इंतजार में कई उम्मीदवार निराश होकर दूसरा करियर विकल्प अपनाने को मजबूर हो चुके हैं।

CAF वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थी बीते 24 दिनों से रायपुर के तूता धरना स्थल पर परिवार और बच्चों के साथ धरने पर बैठे हैं। इससे पहले दो बार उनकी मुलाकात गृहमंत्री विजय शर्मा से हुई थी, जहां उन्हें सकारात्मक आश्वासन मिला था। लेकिन तीसरी बार जब वे अपनी मांग लेकर गृहमंत्री निवास पहुंचे, तो उन्हें मिलने तक नहीं दिया गया।

नारेबाजी के दौरान कुछ समय तक पुलिस मूकदर्शक बनी रही। इसके बाद पुलिस ने एक-एक कर महिलाओं और बच्चों को फोर्स फूली बस में बैठाया और सभी को तूता धरना स्थल ले जाया गया। गृहमंत्री निवास के बाहर अधूरे खाए समोसे और बच्चों की दूध की बोतलें वहीं पड़ी रहीं, जो स्थिति की गंभीरता बयां कर रही थीं।

इधर, तूता पहुंचने के बाद भी अभ्यर्थी पुलिस बस से उतरने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि या तो उनकी मांग पूरी की जाए, या फिर उनके खिलाफ थाने में FIR दर्ज की जाए। अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि अब वे सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित निर्णय चाहते हैं।

अभ्यर्थियों ने बताया कि वर्ष 2018 में जब CAF की भर्ती निकली थी, तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। मेरिट लिस्ट में शामिल उम्मीदवारों की भर्ती कर ली गई, जबकि वेटिंग लिस्ट के 417 अभ्यर्थियों को यह कहकर रोक दिया गया कि फिलहाल पद खाली नहीं हैं। इसके बाद मेरिट लिस्ट के कई उम्मीदवार मेडिकल में फेल हो गए या नौकरी छोड़ दी, जिससे पद खाली हुए, लेकिन तब तक सरकार बदल चुकी थी। कांग्रेस सरकार के दौरान भी इन वेटिंग लिस्ट अभ्यर्थियों की भर्ती पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

समय बीतने के साथ इन 417 में से 250 से ज्यादा, यानी 50 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थी ओवर एज हो चुके हैं। भर्ती के समय इनकी उम्र 28 से 32 वर्ष थी, लेकिन ज्वॉइनिंग नहीं मिलने के कारण अब यही अभ्यर्थी 36 से 40 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं और आगे किसी भी भर्ती के लिए अयोग्य हो गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।