रायपुर, छत्तीसगढ़: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा (laxmi Verma) को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। पार्टी हाईकमान ने छह राज्यों के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें छत्तीसगढ़ से उनका नाम शामिल है। इसके अलावा, पार्टी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी बिहार से राज्यसभा का टिकट देने का निर्णय लिया है।
शुरुआती पैनल में कुल 7 नाम शामिल थे — लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, सरोज पांडेय, भूपेंद्र सवन्नी, किरण बघेल और निर्मल। विचार-विमर्श के बाद तीन नामों को अंतिम रूप दिया गया, जिनमें लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल और डॉ. बांधी थे। इसके बाद पार्टी ने राजनीति में 30 साल से सक्रिय और महिला आयोग की सदस्य लक्ष्मी वर्मा को टिकट दिया।
इस बार संगठन और सामाजिक समीकरण के साथ ही महिला प्रतिनिधित्व (मातृशक्ति) को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई गई। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, लक्ष्मी वर्मा का नाम इस कारण सबसे आगे था, क्योंकि उनका संगठन में सक्रिय योगदान और महिला वर्ग में प्रभाव दोनों महत्वपूर्ण माने गए।
हालांकि नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी भी मजबूत दावेदार थे। उनके पास संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक पृष्ठभूमि है, लेकिन महिला प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देने की नीति ने समीकरण बदल दिए।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में राज्यसभा में 5 सदस्य हैं। इनमें से दो सांसदों — फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन का कार्यकाल 2028 तक है, जबकि भाजपा के देवेन्द्र प्रताप सिंह का कार्यकाल 2030 तक है।
राज्यसभा चुनाव में सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं, यानी जनता नहीं बल्कि विधायक वोटिंग करते हैं। सीटों की संख्या और विधायकों की संख्या के आधार पर हर उम्मीदवार को जीतने के लिए आवश्यक वोटों का कोटा (Quota) तय होता है।
छत्तीसगढ़ की दो खाली सीटों के उदाहरण से यह स्पष्ट होता है: विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। गणना इस प्रकार है:
कुल विधायक ÷ (रिक्त सीटें + 1) + 1 = 90 ÷ (2+1) + 1 = 31।
यानी किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 31 विधायकों के प्रथम वरीयता मत चाहिए।