CG-लोकसभा चुनाव : BJP के पास ‘मोदी गारंटी’ का अमोघ अस्त्र! तो कांग्रेस के हाथ सिर्फ ‘भ्रष्टाचार’ के अरोपों पर वाक युद्ध

लोकसभा चुनाव में इस बार अगर मोदी फैक्टर को छोड़ दिया जाए तो बीजेपी-कांग्रेस में वाक युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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  • Updated On - April 12, 2024 / 05:47 PM IST

रायपुर। लोकसभा चुनाव में इस बार अगर मोदी फैक्टर को छोड़ दिया जाए तो बीजेपी-कांग्रेस (BJP-Congress) में वाक युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। जहां बीजेपी मोदी की गारंटी (BJP Modi’s guarantee) पर अपनी चुनावी नैया को 11 की 11 सीटों पर बेड़ा पार करने में लगी है। वहीं कांग्रेस के पास सिर्फ मोदी की गारंटी के बहाने पीएम मोदी पर वार करने में ही जुटी है। जबकि बीजेपी छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार के काम और उनके पूरे नहीं हो पाने वादों के साथ-साथ भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रही है। लेकिन कांग्रेस अपने न्याय पत्र को लेकर जाने के बजाए सिर्फ BJP के आरोपों का जवाब देने में ही जुटी है।

  • इधर, बीजेपी कांग्रेस के इस मौके का फायदा उठाकर जनता के बीच मोदी के गारंटी और विष्णुदेव साय सरकार के 3 तीने में पूरी हाेने वाली गारंटियों की ब्रांडिंग करने में चुपचाप जुटी है। पर कांग्रेस की विवशता है कि पार्टी छोड़ने वाले असंतुष्टों की एक लंबी चौड़ी लिस्ट बनती जा रही है। इसके आलावा पार्टी के अंदर असंतुष्टों को ही मनाने में पूरी ऊर्जा कांग्रेस की खर्च हो जा रही है। इन सबके के बीच कांग्रेस ने नेता अपनी जनघोषणाओं के बजाए पीएम मोदी लेकर आवेश जो बयान सार्वजनिक रूप से दे दे रहे हैं, उस पर भी पार्टी के बड़े नेताओं को सफाई देने की नौबत आ जा रही है।

हाल ही में पीएम मोदी के सिर फोड़ने के लिए नेता प्रतिपक्ष महंत ने जिस तरीके से बयान दिया। इसके बाद पूरी कांग्रेस पार्टी को बीजेपी ने घेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। ऐसे में खुद भूपेश बघेल को उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर सफाई देनी पड़ी और उसके मायने बताने पड़े। इस वाक युद्ध की तपीश अभी शांत भी नहीं हुई थी कि तब तक फिर महंत ने मोदी के गारंटी को लेकर सवाल खड़े करते-करते उनकी जुबान फिर फिसल गई और पीएम मोदी को डिफाल्टर तक कह दिया है। इससे महंत जी के बयान से बीजेपी के भी बर्दाश्त की सारी सीमाएं टूट गई। लिहाजा, विपक्ष को कुत्ते की पूंछ की तुलना करने वाले पोस्ट से एक फिर छत्तीसगढ़ की सियासत में वाक युद्ध भड़क उठा।

  • लेकिन सवाल उठता है क्या कांग्रेस के पास वास्तव में मोदी की गारंटी की वजह से जनमुद्दे उठाने का कोई मौका नहीं रह गया है। पीएम मोदी और एक-दूसरे नेताओं पर व्यक्तिगत टिप्पणी के अलावा कुछ बचा नहीं है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि इसकी बड़ी वजह है कि कांग्रेस ने कुछ महीने पहले ही सत्ता सुख भोगने से मुक्त हुई है। ऐसे में अगर कांग्रेस को जनसुविधाओं और मूलभूत सुविधाओं को लेकर चुनावी माहौल में मुद्दा उठाएगी तो वह खुद इस मुद्दे पर घिर जाएगी।

कांग्रेस के शासनकाल में रायपुर के स्मार्ट सिटी बनाने की बात हो या गौठान की। इनकी हालत तो कांग्रेस की सरकार रहते ही खस्ता हालत हो गई थी। कांग्रेस कह रही है कि अभी 18 लाख गरीबों के आवास नहीं बने हैं। जिस पर बीजेपी पलटवार करके कांग्रेस के आरोपों की धज्जियां उड़ा देती है। क्योंकि तर्क है कि कांग्रेस की भूपेश सरकार ने ही पीएम आवास को रोक रखा था, जिसे लेकर भूपेश को जिम्मेदार ठहराते हुए मंत्री टीएस सिंहदेव ने पंचायत व ग्रामीण मंत्रालय से इस्तीफा दिया था। वैसे भी बात जनता से छिपी नहीं है। इसके अलावा सत्ता के लिए चले कांग्रेस में सत्ता संघर्ष की चली फिक्चर के चलते जनता यह समझ रही है कि कांग्रेस में सत्ता लोलुपता का भाव है। जिसे सच साबित करने में बीजेपी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है।

  • बता दें, कोयला घोटाला, शराब घोटाला, चावल घोटाले, डीएमएफ फंड, गौठान घोटाला सहित अन्य घोटाले के आरोप बीजेपी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान लगाया था। इसमें शराब, कोयला घोटाले की जांच ईडी के बाद ईओडब्ल्लू और एसीबी की चल रही है। वैसे कोयला सहित अन्य घोटालों की जांच फिर से राज्य की जांच एजेंसियों ने शुरू कर दिया है। अब इसे लेकर कांग्रेस चाहे जो भी आरोप लगाए। लेकिन बीजेपी का कहना है कि एजेंसी ने करोड़ों की नकदी और बेनाम संपत्तियों के दस्तावेज जब्त हुए हैं। कोर्ट तय करेगा, इसमें बीजेपी और केंद्र सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। कांग्रेसी अनर्गल आरोप लगा रहे है। लेकिन जनता सब देख समझ रही है अब कांग्रेस का लूट तंत्र केंद्र की सत्ता में नहीं आने देगी। क्योंकि इनकेइंडी गठबंधन के दल भी भ्रष्टचार के दलदल में फंसे हैं।

कांग्रेस कह रही है कि इडी-आईटी व सीबीआई बीजेपी के राजनैतिक हथियार है। इस पर बीजेपी का कहना है कि कोर्ट में सभी मामले चल रहे हैं। अगर निर्दोष होते तो कोर्ट से जमानत मिल जाती है। इसमें बीजेपी का कहीं से भी लेना देना नहीं है, जो भ्रष्टाचार किए हैं, उन पर संवैधानिक कार्रवाई तो होगा ही। पीएम मोदी ने भी अपने व्यक्तब्य में कहा है कि भाजपा का नारा है भ्रष्टाचार हटाओ और कांग्रेस का नारा है भ्रष्टाचारी बचाओ।

बरहाल, इसमें कितनी सच्चाई है ये तो संवैधानिक संस्थाओं पर छोड़ना उचित होगा। लेकिन जनता इन सियासी बयानों को सुन और देख रही है। इससे लोकसभा के चुनाव पर कितना फर्क पड़ता है। ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

  • छत्तीसगढ़ कांग्रेस का दावा है कि इस बार पिछली बार से अधिक सीटें जीतेंगे। लेकिन बीजेपी का कहना है कि माेदी की गारंटी की लहर पूरे देश में चल रही है 400 पार सीटों के साथ प्रदेश की सभी 11 की 11 लोकसभा की सीटों पर जीत हासिल करेंगे। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने कांग्रेस को अपने ही पिच पर खेलने के लिए मजबूर कर दिया है। क्योंकि न्याय पत्र में जो भी सारी चीजे हैं वह सिर्फ मोदी की गारंटी का विरोध मात्र ही दिखता है। जिसे राजनीतिक जानकार मानते हैं। ऐसे में कांग्रेस की राहें कठिन और बीजेपी की राह आसान।

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