रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग (Outsourcing), पुलिस सत्यापन (Police Verification), प्लेसमेंट (Placement) और ब्लैकलिस्टेड (Blacklisted) दवाइयों की खरीद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। सदन में कॉल मी सर्विसेस के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा।
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक धरमलाल कौशिक ने सरकारी अस्पतालों में प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से रखे गए कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन पर सवाल उठाया। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि निविदा नियमों के अनुसार कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। उन्होंने बताया कि दो संस्थानों में पुलिस सत्यापन कराया जा चुका है और बाकी अस्पतालों में भी यह प्रक्रिया जारी है।
धरमलाल कौशिक ने आरोप लगाया कि उनके प्रश्न लगाने के बाद कर्मचारियों का सत्यापन कराया गया, जबकि एजेंसियों को पहले ही भुगतान किया जा चुका था। उन्होंने कॉल मी सर्विसेस पर प्रतिबंध लगाने और नियमों के उल्लंघन की जांच कराने की मांग की। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश के जिला अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित एमओयू (MoU) में वेतन रोकने का कोई प्रावधान नहीं है।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग के जरिए काम कर रही कंपनियों और स्वीकृत पदों की जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि सफाई और सुरक्षा जैसे कार्यों के लिए आउटसोर्सिंग उचित है, लेकिन बड़े पदों पर इस व्यवस्था को बंद किया जाना चाहिए। मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जवाब में कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, मेडिकल कॉलेज और सीजीएमएससी समेत कई संस्थान अपने स्तर पर आउटसोर्सिंग करते हैं तथा ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड सहित अन्य पदों पर भी प्लेसमेंट के जरिए नियुक्तियां होती हैं। हालांकि कंपनियों और पदों की संख्या को लेकर सदन में दोनों पक्षों के बीच बहस जारी रही।
सदन में गुजरात में ब्लैकलिस्टेड बताई गई दवाइयों की छत्तीसगढ़ में खरीद का मुद्दा भी गूंजा। कांग्रेस विधायक डॉ. चरणदास महंत और विधायक अटल श्रीवास्तव ने सरकार से सीजीएमएससी के माध्यम से दवाइयों की खरीद पर सवाल उठाए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जिस दवा की खरीद की गई, वह गुजरात में ब्लैकलिस्ट की गई दवा से अलग है। उन्होंने बताया कि दोनों दवाओं का केमिकल फॉर्मूला समान हो सकता है, लेकिन उनका उपयोग और प्रभाव अलग है। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर संबंधित दवा की सप्लाई रोक दी गई है। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई दवा प्रतिबंधित होगी तो उसकी खरीद किसी भी स्थिति में नहीं की जाएगी।