भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक सदन में पेश कर दिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गौतम टेटवाल ने विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत किया, जिसके दौरान कांग्रेस विधायकों ने जोरदार हंगामा किया। UCC के साथ सरकार ने कुल 14 विधेयक सदन में पेश किए हैं, जिन पर सत्र के दौरान चर्चा होगी।
विधेयक में विवाह (Marriage), तलाक (Divorce), उत्तराधिकार (Inheritance), गोद लेने (Adoption) और लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) से जुड़े मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। ड्राफ्ट के अनुसार एक से अधिक विवाह पर रोक होगी, विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाया जाएगा, जबकि लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का भी प्रावधान रखा गया है। साथ ही निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को अपराध की श्रेणी में लाने का प्रस्ताव भी शामिल है।
विधेयक के मुताबिक बेटे-बेटियों, विधवाओं, विधुरों और माता-पिता को संपत्ति में समान अधिकार मिलेंगे। लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें उत्तराधिकार का अधिकार भी मिलेगा। वहीं, बल, धोखाधड़ी, पहचान या वैवाहिक स्थिति छिपाकर किए गए विवाह को शून्यकरणीय घोषित करने का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित UCC में अनुसूचित जनजातियों (ST) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि इस कानून से आदिवासी समाज की परंपराओं और रीति-रिवाजों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
वहीं, कांग्रेस ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे लेकर कई सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि यदि समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों के लिए है तो अनुसूचित जनजातियों को इससे बाहर क्यों रखा गया है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सभी विधेयकों पर सदन में नियमानुसार चर्चा कराई जाएगी।