छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: CM-मंत्रियों के काफिले में कटौती, विदेश यात्रा पर रोक, सरकारी खर्च कम करने लागू हुए नए नियम

सरकार ने सरकारी संसाधनों के सीमित और सही उपयोग पर जोर दिया है। नए आदेश के अनुसार अब अधिकारियों के लिए वाहन पूलिंग (Vehicle Pooling) सिस्टम लागू किया जाएगा।

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  • Publish Date - May 16, 2026 / 11:25 PM IST

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने बढ़ते सरकारी खर्चों पर नियंत्रण लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब केवल जरूरी कामों पर ही खर्च किया जाए और फिजूलखर्ची को पूरी तरह रोका जाए। वित्त विभाग (Finance Department) की ओर से जारी नए आदेश के मुताबिक मुख्यमंत्री, मंत्रियों और निगम-मंडलों के अधिकारियों के काफिलों (Convoy) में शामिल कुछ गाड़ियों की संख्या कम की जाएगी।

सरकार ने सरकारी संसाधनों के सीमित और सही उपयोग पर जोर दिया है। नए आदेश के अनुसार अब अधिकारियों के लिए वाहन पूलिंग (Vehicle Pooling) सिस्टम लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि एक ही दिशा या जगह जाने वाले अधिकारी अलग-अलग वाहनों की बजाय एक ही गाड़ी का इस्तेमाल करेंगे। इससे पेट्रोल-डीजल की बचत होगी, सरकारी खर्च कम होगा और ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा।

वित्त विभाग ने साफ कहा है कि सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा (Foreign Travel) करने वाले अधिकारियों को पहले मुख्यमंत्री से अनुमति लेनी होगी। केवल बेहद जरूरी मामलों में ही विदेश यात्रा की मंजूरी दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक खर्चों पर रोक लगेगी और सरकारी धन का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

जारी आदेश के मुताबिक ये सभी निर्देश 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेंगे और सभी विभागों के लिए इनका पालन करना अनिवार्य होगा। सरकार ने विभागों को निर्देश दिया है कि वे संसाधनों का उपयोग बेहद जरूरी जरूरतों तक सीमित रखें।

सरकार ने IGOT कर्मयोगी (IGOT Karmayogi) पोर्टल के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है। यह केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म है, जहां सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को नई तकनीक, प्रशासनिक कामकाज और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े कोर्स कराए जाते हैं। इस पोर्टल के जरिए कर्मचारियों को डिजिटल तरीके से ट्रेनिंग दी जाती है ताकि प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक प्रभावी बनाई जा सके।

सरकार का कहना है कि इन फैसलों से राज्य की वित्तीय व्यवस्था मजबूत होगी और सरकारी पैसों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।